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एसआईआर में बड़ा खुलासा,एक लाख मतदाता नदारद,सिर्फ 20 हजार ने किया दावा आपत्ति….

एक लाख गायब,बीस हजार सक्रिय, एसआईआर पर उठे गंभीर सवाल….

एसआईआर की रिपोर्ट ने चुनावी तैयारी पर डाला साया,वोट से पहले वोटर पर संकट….

बिलासपुर।एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण।मतदाता सूची सुधारने की यह प्रक्रिया अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है।दावा और आपत्ति के लिए आज, 22 जनवरी, आख़िरी दिन है।जिला निर्वाचन कार्यालय में पूरे दिन लोगों की भीड़ रही।नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए कुल 20 हजार 978 आवेदन आए हैं।लेकिन इसी बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा सामने आया है।निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, एसआईआर के दौरान करीब एक लाख दो हजार मतदाता नदारद पाए गए हैं।इन सभी को नोटिस जारी किए जाने की बात कही गई है।अब यहीं से गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अगर एक लाख से ज्यादा मतदाता नदारद हैं।तो सिर्फ बीस हजार लोगों ने ही नाम जोड़ने या हटाने का आवेदन क्यों दिया?एसआईआर के दौरान बीएलओ के सर्वे में यह भी सामने आया किजिले में 71 हजार 769 मतदाता परलोक सिधार चुके हैं,लेकिन उनके नाम पहले मतदाता सूची से नहीं काटे गए थे।विधानसभा वार आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं।बिलासपुर में 11 हजार से ज्यादा,मस्तूरी में 14 हजार से ज्यादा,कोटा में 12 हजार से ज्यादा मतदाताओं की मौत दर्ज की गई।एक तरफ लोग सक्रिय होकर आवेदन कर रहे हैं,दूसरी तरफ एक लाख से ज्यादा मतदाताओं का अचानक गायब होना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है,लेकिन आंकड़ों और ज़मीनी हकीकत के बीच का यह अंतर एसआईआर को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

*दावा आपत्ति करने वालो की हो रही सुनवाई*

एसआईआर को लेकर जिला प्रशासन भले ही गंभीर है लेकिन दावा आपत्ति को लेकर
आमजन गंभीर नहीं है तभी तो कई लोगो के इसमें रुचि नहीं दिखाई और कई लोगों ने दावा आपत्ति नहीं की है।जिसको लेकर खुद जिला प्रशासन भी आश्चर्य में है।हालाकि दावा यही किया जा रहा है कि कुछ दिनों में लोगो की दावा आपत्ति आ जाएगी,लेकिन एक समय खत्म होने के बाद दावा आपत्ति किसी काम का नहीं रहेगा।

वर्जन
एसआईआर को लेकर लोग जागरूक हुए है जो दावा आपत्ति कर रहे है।जिनकी सुनवाई भी होगी।

संजय अग्रवाल
कलेक्टर बिलासपुर

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