भेड़, बकरी, घोड़ा और ऊंट के बाद अब गधा ने भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना में नाम दर्ज

बिलासपुर- भेड़, बकरी, घोड़ा और ऊंट के बाद अब गधा ने भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। दिलचस्प यह कि इसके पालन पर योजना के मुताबिक 50% कैपिटल सब्सिडी भी संबंधित पशुपालक को दी जाएगी।
पशुपालन के केंद्र में रहे हैं गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और ऊंट क्योंकि यह सभी दूध देते हैं। अतिरिक्त आय का साधन है यह सभी आज भी लेकिन गधा के साथ ऐसी कोई बात नहीं है सिवाय बोझा ढोने के अलावा, पर अब यह भी खत्म हो चुका है क्योंकि बोझ या वजन वहन करने के लिए कई साधन आ गए हैं। बस इसी एकमात्र कारण ने गधा पालन से मवेशी पालकों को दूरी बनाने के लिए विवश कर दिया है।
इसलिए मिशन में गधा
मवेशी पालकों की अरुचि के बाद देश में गधों की आबादी तेजी से घट रही है। आबादी के चिंताजनक आंकड़ों के सामने आने के बाद राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना में गधा को शामिल किया जा चुका है। पालन को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत 50% कैपिटल सब्सिडी देने की व्यवस्था की गई है। दो किस्तों में यह सब्सिडी मिलेगी। पहली किस्त मंजूरी के बाद और दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद।
नियम और पात्रता
गधा पालन के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन की योजना के अनुसार संबंधित आवेदक के पास 50 मादा और 5 नर गधा का होना आवश्यक है। यह सभी देशी नस्ल के होने चाहिए। आय का प्रमाणित अनुमान, जमीन के दस्तावेज, पशुपालन से संबंधित प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र पेश करना होगा।
जानिए मिशन को
राष्ट्रीय पशुधन मिशन केंद्र सरकार की योजना है। यह योजना 2014-15 में शुरू हुई थी। उद्देश्य था भेड़, बकरी, घोड़ा और ऊंट के पालन, उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा देना। इसमें आंशिक संशोधन के बाद गधा पालन को भी शामिल किया गया। इसे 21 फरवरी 2024 को कैबिनेट की मंजूरी मिली।