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वन विभाग के पेड़ों की बलि…वन विभाग का दफ्तर भी पीछे नहीं

बिलासपुर। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत हरियाली बचाने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का संदेश दे रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में हरित क्रांति की जड़ें ही काटी जा रही हैं। रायगढ़ में ब्लॉक निर्माण के नाम पर लाखों पेड़ों की बेरहमी से कटाई हो रही है, तो बिलासपुर — जिसे न्यायधानी कहा जाता है — में खुद वन विभाग के अफसर अपने दफ्तर के हरे-भरे पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़ने में संकोच नहीं कर रहे।

न्यायधानी के वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक दफ्तर परिसर में ही हरे-भरे, स्वस्थ पेड़ों की कटाई कर दी गई। इस काम के लिए न तो किसी तरह की सार्वजनिक सूचना दी गई और न ही आवश्यक अनुमति लेने की औपचारिकता पूरी की गई। इस मामले को लेकर मुंह के वन संरक्षक प्रभात मिश्रा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि एक अशोक का पेड़ गिर रहा था जिसे ही काटा गया है इसके अलावा और कोई अन्य पेड़ों की कटाई नहीं की गई है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों ने आरोप लगाया है कि यह घटना कोई पहली नहीं है। इसके पहले भी दफ्तर के पास लगे हरे-भरे पेड़ों को कथित “विकास कार्य” के नाम पर काट दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि जिस आठ रोड इलाके में जिला प्रशासन ने कुछ साल पहले बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया था, वहां आज पौधे सूखे पड़े हैं या अस्तित्व में ही नहीं हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब संरक्षण का जिम्मा खुद सरकारी विभागों पर है, और वही खुलेआम पेड़ों की बलि चढ़ा रहे हैं, तो आम नागरिकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उनका सवाल है — क्या यह आज़ादी सिर्फ नारों में ही सीमित रह गई है।

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