वेलकम डिस्टलरी पर सियासत तेज,बंद फैक्ट्री खुलवाने कलेक्टर पहुंचे मजदूर….कलेक्टर कार्यालय के सामने बैठकर न्याय की लगाई गुहार…..बोले,फैक्ट्री बंद होने से रोजी रोटी का संकट गहराया

बिलासपुर – कोटा की वेलकम डिस्टलरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। पिछले दिनों एक पक्ष की शिकायत और विरोध के बाद फैक्ट्री बंद कर दी गई थी। अब दूसरा पक्ष बंद पड़ी फैक्ट्री को दोबारा शुरू कराने की मांग लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गया। डिस्टलरी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब रोजगार, पर्यावरण और राजस्व का मुद्दा भी राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। वहीं, फैक्ट्री बंद होने से करीब 800 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने का दावा किया जा रहा है।
कोटा में वेलकम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड की आसवनी और बॉटलिंग इकाई संचालित होती है। कंपनी शराब निर्माण और पैकेजिंग के साथ परिवहन का काम भी करती है। फैक्ट्री के संचालन को लेकर अब दो पक्ष आमने-सामने हैं। एक पक्ष जहां फैक्ट्री बंद रखने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसके संचालन के समर्थन में खड़ा है।

शुक्रवार को मजदूरों और कर्मचारियों का एक समूह कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और फैक्ट्री शुरू कराने की मांग रखी। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री बंद होने से करीब 800 परिवार प्रभावित हुए हैं, जिससे लगभग 4 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
बताया जा रहा है कि पर्यावरण विभाग की ओर से फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले स्प्रिट को लेकर जांच के बाद कार्रवाई की गई थी। अब कर्मचारियों और मजदूर नेताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि फैक्ट्री प्रबंधन और पर्यावरण विभाग के बीच समन्वय कर नियमों के अनुरूप समाधान निकाला जाए, ताकि रोजगार का संकट दूर हो सके। दूसरी तरफ, फैक्ट्री बंद रखने की मांग करने वाला पक्ष पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठा रहा है। शिकायत में फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी और कचरे से गांव के पर्यावरण और जलस्रोतों पर असर पड़ने का आरोप लगाया गया है।

यानी वेलकम डिस्टलरी अब सिर्फ एक औद्योगिक इकाई का मामला नहीं रह गई है। इसके साथ रोजगार, पर्यावरण, राजस्व और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे कई सवाल जुड़ गए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सरकार और प्रशासन इन सभी पहलुओं के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं। फिलहाल डिस्टलरी को लेकर सियासत गरमा गई है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा आंदोलन या बड़े राजनीतिक मंच तक पहुंचता है या नहीं, इस पर सबकी नजर है।
