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समझौते का दबाव बनाकर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी, ग्रामीण ने कलेक्टर से की शिकायत

बिल्हा थाना के तीन पुलिसकर्मियों पर मानसिक प्रताड़ना और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप

मारपीट मामले में निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग

बिलासपुर। बिल्हा थाना क्षेत्र के ग्राम मोहतरा निवासी आयुष बरगाह व राजेश बरगाह ने पुलिसकर्मियों पर समझौते का दबाव बनाने, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की बात कहकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

आयुष राजेश बरगाह का कहना है कि उनके द्वारा पूर्व में हुई एक मारपीट की घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई थी, लेकिन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय थाना बिल्हा में पदस्थ कुछ पुलिसकर्मी लगातार उन पर समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। शिकायत में प्रधान आरक्षक अमर सिंह चंद्रा, मुकेश दिव्या और प्रताप साहू का नाम उल्लेखित करते हुए कहा गया है कि तीनों पुलिसकर्मी बार-बार यह कहकर डराने का प्रयास कर रहे हैं कि “तुम लोगों को जेल जाना तय है, समझौता कर लो, नहीं तो एससी-एसटी एक्ट लग जाएगा।”

पीड़ित ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी न केवल थाने में बल्कि घर पहुंचकर भी धमकी दे रहे हैं और पुराने मामलों का हवाला देकर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बातचीत के दौरान जातिगत संदर्भ देकर डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में है।

आयुष बरगाह ने दावा किया है कि पुलिसकर्मियों द्वारा दी गई धमकी और बातचीत के कुछ हिस्सों की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है, जिसे उन्होंने जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि रिकॉर्डिंग को जांच में शामिल किया जाए तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

शिकायत में 19 अप्रैल 2026 की मारपीट घटना का भी उल्लेख किया गया है। पीड़ित के अनुसार घटना का सीसीटीवी फुटेज पुलिसकर्मी के मोबाइल में मौजूद है, जिसमें आरोपी सरपंच पुत्र और उसके साथी लाठी-डंडों से राजेश बरगाह की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं। इसके बावजूद अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने, आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित करने तथा पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देकर बनाए जा रहे दबाव की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

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