संतान की सुख समृद्धि के लिए माताएं करेंगे खमरछठ का व्रत
बाजारों में पूजन सामग्री लेने सुबह से शाम तक रही भीड़
बिलासपुर।भाद्रपद माह की षष्ठी तिथि पर कई प्रमुख बड़े व्रत त्योहार पड़ते हैं। यह पर्व हलषष्ठी, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ, कमर छठ या खमर छठ के नामों से भी जाना जाता है। हल छठ या हल षष्ठी के दिन महिलाएं संतान के सुख की कामना के लिए व्रत रखती हैं। हल छठ का दिन बलरामजी का जन्म हुआ था और हल उनको प्रिय था. इस कारण इस दिन हल जोतकर उगाई हुई चीजों का सेवन नहीं किया जाता है। हलषष्ठी का व्रत खासतौर पर पुत्र के सौभाग्य, स्वास्थ्य और सुख के लिए किया जाता है।इस दिन दीवार पर छठी माता की आकृति बनाकर उनकी पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा के अनुसार व्रत करने वाली महिलाएं सुबह महुआ के दातुन से दांत साफ करती हैं। इस व्रत में महिलाएं भैंस का दूध ,घी व दही का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि गाय का दूध और दही का उपयोग नहीं किया जाता है। विशेष रूप से हल की पूजा की जाती है। लिहाजा गुरुवार को सभी घरों में हलषष्ठी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है जिसके मद्देनजर बाजार में पूजन सामग्रियों उपलब्ध हो गई है। लिहाजा बाजारों में पूजन सामग्री खरीदने सुबह से शाम तक महिलाएं नजर आई ।