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“सरकारी सहायता के बावजूद गौवंश की मौत! ओखर गौधाम में व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल”

सरकारी सहायता के बावजूद गौवंश की मौत का दावा, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

मस्तूरी। बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत ओखर स्थित गौशाला वासुदेव सेवा समिति द्वारा संचालित गौधाम में गौवंश की लगातार मौत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौधाम में पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में गायों की मौत हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब 25 से अधिक गौवंश की मौत हो चुकी है।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शासन द्वारा पंजीकृत गौशालाओं के संचालन तथा संरक्षित गौवंश के पालन-पोषण और संवर्धन के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती हैं।

सरकार से मिलती है गौशालाओं को सहायता

छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के माध्यम से पात्र एवं पंजीकृत गौशालाओं को संरक्षित गौवंश के पालन-पोषण एवं संवर्धन के लिए अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। मार्च 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, पात्रता के आधार पर अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति गौशाला प्रति वर्ष तक अनुदान का प्रावधान बताया गया है।

इसके अलावा निराश्रित, घुमंतु और जब्त गौवंश के संरक्षण के लिए गौधाम योजना भी संचालित है। योजना के तहत गौधाम में शेड अथवा बाड़ा, पानी, बिजली और चारा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जाता है।

पात्र गौशाला एवं गौधाम में गौवंश के पोषण और चारा व्यवस्था के लिए योजनानुसार सहायता के साथ-साथ पशु चिकित्सा विभाग के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और उपचार जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

फिर ओखर में गौवंश की मौत क्यों?

यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि यदि गौवंश के संरक्षण और पालन-पोषण के लिए शासन स्तर पर योजनाएं और आर्थिक सहायता उपलब्ध हैं, तो ओखर की गौधाम में पर्याप्त चारा-पानी और स्वास्थ्य व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही है?

क्या गौधाम में मौजूद गौवंश की संख्या के अनुसार पर्याप्त चारा और पानी उपलब्ध कराया जा रहा था?

क्या गौधाम में नियमित रूप से पशु चिकित्सकों द्वारा निरीक्षण किया जा रहा था?

क्या गौशाला को प्राप्त होने वाली शासकीय सहायता का नियमानुसार उपयोग किया जा रहा है?

इन सवालों का जवाब प्रशासनिक और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

सरपंच प्रतिनिधि लक्ष्मी यादव से मिली जानकारी के अनुसार गौधाम में रखरखाव, पानी और चारे की भारी कमी की समस्या बताई गई है। ग्रामीणों का दावा है कि गौधाम में लगातार गौवंश की मौत हो रही है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मृत गायों को गड्ढे खोदकर जमीन में दबाया गया, जबकि कुछ मृत गौवंश को खुले स्थान पर फेंके जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि गौधाम में मौजूद गौवंश की संख्या, उपलब्ध चारा-पानी, पशु चिकित्सा व्यवस्था, मृत गौवंश की संख्या तथा शासन से प्राप्त सहायता सहित पूरे रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।

पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने किया निरीक्षण

मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर पशु चिकित्सा विभाग की टीम गौधाम का निरीक्षण करने पहुंची। टीम ने गौवंश की स्थिति का जायजा लिया और गौधाम के अंदर मौजूद बड़ी संख्या में गायों को बाहर निकलवाया गया।

गायों के बाहर निकलते ही आसपास के किसानों के खेतों में पहुंचने से किसानों में भी नाराजगी देखने को मिली। किसानों का कहना है कि यदि गौधाम में व्यवस्था नहीं है और बड़ी संख्या में गौवंश को खुले में छोड़ा जाता है, तो इससे उनकी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।

निरीक्षण के दौरान डॉ. जी.एस.एस. तावर, डॉ. आर.के. चौरसिया, डॉ. संध्या तिवारी, विकासखंड प्रभारी पशुधन विभाग सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।

सरकारी जमीन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट

यह भी महत्वपूर्ण है कि केवल गौशाला संचालित करने से सरकारी जमीन अपने आप उपलब्ध नहीं हो जाती। शासन की जानकारी के अनुसार गौशाला अथवा पशु संधारण केंद्र के लिए भूमि आरक्षित करने का सामान्य प्रावधान नहीं है। हालांकि गौधाम योजना के तहत उपयुक्त शासकीय भूमि का चयन किया जा सकता है।

कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गौधाम में गौवंश की मौत की वास्तविक वजह सामने लाई जाए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही चारा-पानी और गौवंश के उपचार की उचित व्यवस्था नहीं की गई तथा मामले का निराकरण नहीं हुआ तो वे बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आंदोलन करेंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ओखर की गौधाम में आखिर 25 से अधिक गौवंश की मौत कैसे हुई? क्या वास्तव में चारा-पानी की कमी इसकी वजह थी या गौवंश की मौत के पीछे कोई अन्य कारण है? क्या गौशाला को मिलने वाली शासकीय सहायता का सही उपयोग किया गया या नहीं?

इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक एवं पशु चिकित्सा विभाग की निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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