Blog

11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में सेमिनार एवं कार्यशाला आयोजित

“स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” का संदेश देते हुए म्यूजिक थेरेपी, पंचकर्म एवं अग्निकर्म का व्यावहारिक प्रशिक्षण

बिलासपुर। आगामी 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में जिला आयुष विभाग, बिलासपुर द्वारा “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” की थीम पर एक दिवसीय सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ आयुष चिकित्सकों के चिकित्सकीय कौशल को और अधिक सुदृढ़ करना था।

कार्यशाला में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान के साथ प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन प्रस्तुत किए गए।

म्यूजिक थेरेपी: कारुण्य पैलीएटीव केयर व सुप्रजा राष्ट्रीय कार्यक्रमो में संगीत चिकित्सा बहुत ही कारगर है।डॉ. रश्मि जितपुरे ने मानसिक तनाव, अवसाद एवं जीवनशैली से संबंधित समस्याओं में संगीत चिकित्सा की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि उचित संगीत, लय एवं ध्वनि का चिकित्सकीय उपयोग मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन एवं समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

पंचकर्म चिकित्सा: डॉ. अनिल सोनी ने पंचकर्म चिकित्सा के विभिन्न आयामों, प्रक्रियाओं एवं चिकित्सकीय उपयोगिता की जानकारी देते हुए इसके व्यावहारिक पहलुओं को समझाया। उन्होंने विभिन्न रोग अवस्थाओं में पंचकर्म के उचित प्रयोग एवं सावधानियों पर भी प्रकाश डाला।

विद्धकर्म एवं अग्निकर्म: डॉ. कुमुदिनी पटेल द्वारा दर्द प्रबंधन एवं मस्कुलोस्केलेटल विकारों में विद्धकर्म एवं अग्निकर्म की उपयोगिता पर व्याख्यान के साथ लाइव प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन दिया गया। प्रतिभागियों को इन प्रक्रियाओं की तकनीक, संकेत एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य संरक्षण का माध्यम है। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” की दिशा में चिकित्सकों का निरंतर प्रशिक्षण और नवीन व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं आयुष चिकित्सकों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ उनके व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक पक्ष को समझने में सहायता करती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मजबूत होती है।

कार्यशाला में जिले के विभिन्न आयुष संस्थानों से आयुष चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी एवं संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न चिकित्सा सत्रों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा विशेषज्ञों से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम के माध्यम से “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने तथा आयुर्वेद को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण आधार बनाने का संकल्प लिया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *