1200 से अधिक कृषकों ने खेत बचाओ अभियान में शिरकत की…वैज्ञानिक बोले,खेती नहीं रहेगा तो फसल कैसे होगा….

कृषि विज्ञान केंद्र के अभियान में गांव गांव
पहुंचे किसान,किया गया किसानों को जागरूक
बिलासपुर। कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गीत शर्मा के मार्गदर्शन में 1 जून से 30 जून तक “खेत बचाओ अभियान का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत जिले के लगभग 36 ग्रामों में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 1200 से अधिक कृषकों ने सक्रिय सहभागिता की।

अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती, नील-हरित शैवाल , मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, बीज उपचार का महत्व, फसलों में संतुलित उर्वरकों के उपयोग, जैव उर्वरकों, जैव नियंत्रण कारकों, हरी खाद तथा रोग, कीट एवं खरपतवार प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही किसानों को धान सहित अन्य फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती तथा कृषि यंत्रों के सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया।

कार्यक्रमों के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान किया तथा उन्हें वैज्ञानिक सलाह प्रदान की। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने, बुवाई से पूर्व बीजोपचार कर बीज एवं मृदाजनित रोगों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

अभियान के दौरान चयनित कृषकों को धान की फसल में जैविक पोषण एवं मृदा उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से नील-हरित शैवाल का मृदा-आधारित कल्चर तथा हरी खाद को बढ़ावा देने हेतु ढैंचा का बीज निःशुल्क वितरित किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को इनके उपयोग की वैज्ञानिक विधि एवं लाभों की भी जानकारी प्रदान की।

इसी अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विभाग, बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय प्राकृतिक कृषि कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें 800 से अधिक किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, बीजोपचार एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

अभियान के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने किसानों से अपील की कि वे मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, बीजोपचार, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तकनीकों तथा वैज्ञानिक खेती की अनुशंसित विधियों को अपनाकर उत्पादन लागत कम करें, मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण करें तथा कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
