बिलासपुर। कलेक्टर कार्यालय और एसपी ऑफिस क्षेत्र शहर की सबसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाली लोकेशन मानी जाती है। इसी भीड़ को नियंत्रित करने और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण किया गया था। उद्देश्य साफ था-सरकारी परिसरों के आसपास होने वाली अव्यवस्थित पार्किंग को रोकना और मुख्य मार्ग को सुगम बनाए रखना।

लेकिन हालात बिल्कुल उलट हैं। पार्किंग के ठीक बगल में वाहन होने के बावजूद लोग बिना किसी रोकटोक के सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं, जिसका असर ट्रैफिक पर भी साफ दिखाई देता है।
एसपी ऑफिस जाने वाले मुख्य मार्ग पर वाहन ऐसे खड़े रहते हैं मानो यह पार्किंग ज़ोन ही हो। सबसे हैरानी की बात यही है कि सड़क के ठीक बगल में मल्टीलेवल पार्किंग मौजूद है, फिर भी वाहन चालक सीधे सड़क को ही इस्तेमाल कर रहे हैं। शहरवासियों के मुताबिक, पार्किंग व्यवस्था लागू करने के लिए न किसी कर्मचारी की तैनाती है और न ही कोई निगरानी।
सरकार और नगर निकाय ने यातायात सुधारने के उद्देश्य से इस परियोजना पर बड़ी राशि खर्च की, लेकिन उसके उपयोग को लेकर गंभीर लापरवाही दिखाई दे रही है। यदि उपयोग ही नहीं होना है, तो फिर इस तरह की परियोजनाओं का औचित्य क्या बचता है।
यदि कड़ाई से पार्किंग नियम लागू किए जाएं, तो आधी से अधिक ट्रैफिक समस्या खुद-ब-खुद खत्म हो सकती है। लेकिन इसके लिए प्रशासन की जवाबदेही तय होना ज़रूरी है।
शहर के इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्र में लगातार वाहन खड़े रहने से न सिर्फ मुख्य मार्ग संकरा होता है बल्कि सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। कलेक्टर और एसपी ऑफिस जैसे महत्वपूर्ण भवनों के पास ट्रैफिक अनुशासन का अभाव प्रशासनिक गंभीरता पर सीधे सवाल उठाता है।




