विभागीय जांच की कार्यवाई में नियम एवं प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है: डॉ. आनंद

राजपत्रित अधिकारियों के लिए विभागीय जांच की प्रक्रिया व कार्यवाई विषय पर रेंजस्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया
बिलासपुर। विभागीय जांच एक अर्द्ध न्यायिक प्रक्रिया है, विभागीय जांच की प्रत्येक कार्यवाही में जांचकर्ता अधिकारी न्यायाधीश की हैसियत से कार्यवाई संपादित करते हैं। विभागीय जांच की कार्यवाई किसी भी शासकीय सेवक के गंभीर कदाचरण की जांच के लिए की जाने वाली एक महत्वपूर्ण कार्यवाई है। चूंकि यह कार्यवाई गंभीर कदाचार एवं कृत्य के अनुपात में दीर्घ शास्ति के लिए की जाती है। विभागीय जांच की कार्यवाई में नियम एवं प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इस कार्यवाई के अंतर्गत दोषी कर्मचारी विभागीय जांच की कार्यवाई में दिए गए दण्ड के विरूद्ध वरिष्ठ अधिकारियों व शासन स्तर पर, तदोपरांत उच्च न्यायालय में परिवाद दायर कर अपनी निर्दोषिता सिद्ध करने का प्रयास करता है। ये बातें भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ डॉ. आनंद तिवारी ने कही।

रेंज अंतर्गत जिलों में पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों के विरूद्ध संस्थित विभागीय जांच में जांच की प्रक्रिया नियमानुसार छग सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1965 व छग पुलिस मैन्युअल एवं रेग्युलेशन्स में दिए गए प्रावधानों के अनुरूप संपादित हो। विभागीय जांच प्रक्रिया का जांचकर्ता अधिकारियों को नियमों का भलीभांति स्मरण रहे और उनके द्वारा नैसर्गिक न्याय के अनुरूप जांच कार्यवाई करते हुए विभागीय जांच कार्यवाई पूर्ण की जाए। इस उद्देश्य से रेंज अंतर्गत जिलों के विभागीय जांचकर्ता राजपत्रित अधिकारियों के लिए गुरुवार को आईजी डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर विभागीय जांच की प्रक्रिया एवं कार्यवाई विषय पर 1 दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कराया गया। डॉ. आनंद तिवारी के द्वारा उपस्थित राजपत्रित अधिकारियों को विभागीय जांच प्रक्रिया एवं विभागीय जांच में होने वाली सामान्य त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट कर शंका समाधान करते हुए अत्यन्त उपयोगी जानकारी दी।

प्रशिक्षण सत्र में बताई गई विभागीय जांच प्रक्रिया की बारीकियां’
विभागीय जांच की प्रक्रिया और जांच के दौरान की जाने वाली कार्यवाइयों को छग सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1965 तथा छ.ग. पुलिस मैन्युअल एवं रेग्युलेशन्स में दिये गये प्रावधानों के अनुरूप किस प्रकार समयावधि में पूर्ण किया जाए। इस संबंध में न्यायालयों के द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रकरणों में क्या-क्या दिशा-निर्देश दिए गए हैं, विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। साथ ही प्रशिक्षण सत्र में उपस्थित प्रतिभागी राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
32 राजपत्रित अधिकारी शामिल हुए
विशिष्ट प्रशिक्षक सेनि अति.पुलिस महानिदेशक डॉ. आनंद तिवारी द्वारा विभागीय जांच से संबंधित विभिन्न न्याय दृष्टांतों, विभागीय जांच प्रक्रिया एवं नियमों का सरल भाषा में व्याख्यान दिया गया। विभागीय जांच नस्ती की फाइलिंग प्रक्रिया के संबंध में बृज बिहारी साहू, निरीक्षक-अ, वरिष्ठ शीघ्रलेखक बिलासपुर द्वारा विभागीय जांच प्रक्रिया के सामान्य निर्देशों व व्यवहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया गया। सत्र में रेंज अंतर्गत जिलों से कुल 32 राजपत्रित अधिकारी सम्मिलित हुए।