नियम विरुद्ध आडिट करनें के नाम पर लेखापाल ने प्रधान पाठकों को कार्यालय बुलावा…प्रधान पाठक हो रहे कंगाल…लेखपाल मालामाल!

बिलासपुर।सूत्रों के हवाले से एक सनसनीखेज खबर निकल कर सामने आ रही है कि समग्र शिक्षा कार्यालय में पदस्थ एक लेखपाल द्वारा स्कूलों में पदस्थ प्रधान पाठकों को कैशबुक और बिल वाउचर लेकर आडिट करने के नाम अपने कार्यालय बुलाया जाता है।
जहाँ लेखपाल द्वारा कार्यालय में प्रधान पाठकों द्वारा लाए गए कैशबुक और बिल वाउचर में गड़बड़ी निकाल कर,पहले तो डराया जाता है और फिर 5000 रुपए में गड़बड़ी ठीक करने का ठेका ले लिया जाता है।
कहते हैं कि लेखपाल, प्रधान पाठकों द्वारा बनाए गए फर्जी बिल वाउचर और केशबुक सुधारने का काम डंके की चोट पर 5 हजार रुपए लेकर कार्यालय में बेखौफ होकर किया जाता है।
ऐसा बताया जाता है कि लेखपाल द्वारा ऑडिट करवाने और शाला अनुदान राशि को ऑनलाइन PFMS करनें का अलग से राशि लिया जाता है।
जबकि इसके उलट छत्तीसगढ़ शासन द्वारा हर तीन साल में स्कूलों का CA के द्वारा आडिट कराई जाती है। जिसकी फीस भी प्रधान पाठकों द्वारा जमा की जाती है और रसीद ली जाती है।
जानकर कहते हैं कि इन्हीं सब गड़बड़ी की शिकायत डीईओ और बीईओ तक चली गई थी तब बीईओ कार्यालय द्वारा एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें पूछा गया था कि आडिट के नाम पर प्रधान पाठकों को कार्यालय बुलाकर रुपयों की मांग क्यों की जाती है।
एक बार तो हद ही हो गई थी लेखपाल नें एक शिक्षक को फोन पर बोला कि मैं तुम्हारे एकाउंट में एक लाख रुपए जमा कर रहा हूँ तुम निकाल कर मझे नगद राशि दे देना शिक्षक नें कहा कि ठीक है इनकम टैक्स की राशि काट कर दिया जा सकता है, तब कहीं जाकर मामला टल गया नहीं तो बेवजह शिक्षक को 1 लाख रुपए का इनकम टैक्स भरना पड़ता।
हालांकि इसके बाद इस एक लाख रुपए की नगद रकम जमा करने के नाम पर किस किस प्रधान पाठक को बलि का बकरा बनाया गया ……अगले अंक में कुछ और खुलासे के साथ