Blog

शिक्षा के मंदिर को शर्मसार कर देने वाली तस्वीरें…..स्कूल में मासूम बच्चों ने की सफाई….स्कूल ड्रेस पहने बच्चो ने झाड़ू, पोछा और कचरा को उठा कर फेंका….देखिए तस्वीरे

डीईओ के आदेश का भी नहीं करते है पालन

लगातार मिल रही शिकायत के बाद भी बाज नहीं आ रहे शिक्षक

बिलासपुर। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कछार के संकुल केंद्र में शर्मसार कर देने वाली बात सामने आ रही है।जिसे देखकर, पढ़कर और सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे।हमारे पार जो तस्वीरें सामने आई है उसमें स्कूल में झाड़ू कोई और नहीं बल्कि खुद बच्चे लगा रहे है।जिसमें प्रधान पाठक और स्कूल में मौजूद शिक्षकों को इसकी चिंता जरा भी नहीं रही।

स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है।इसमें पढ़ने वाले बच्चे भगवान का रूप होते है।जिनको मौजूद शिक्षक,गुरुजी या जिस भाषा में कहे वो स्कूल पढ़ने आए बच्चो को शिक्षा देते है।लेकिन विकासखंड बिल्हा अंतर्गत ग्राम कछार के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है।बल्कि संकुल केंद्र बने इस स्कूल में बच्चो से ही काम करता जा रहा है।हमारे पार जो तस्वीरें सामने आई है उसमें साफ दिख रहा है कि किस तरह से प्रधान पाठक और गुरुजी बच्चों से काम करवा रहे है।मासूम बच्चे हाथ में कचरे का डिब्बा लेकर कचरा फेंकने जा रहे है।यही नहीं एक हाथ में झाड़ू और एक हाथ में कचरे का डिब्बा लेकर बच्चो से किस तरह से खड़े होकर काम करवाया जा रहा है आप खुद इस तस्वीर के माध्यम से देख सकते है।

परिजन सोच रहे है बच्चे पढ़ने गए है,लेकिन स्कूल के कर रहे है कचरा उठाने और सफाई करने का काम

घर से निकले बच्चे अपने माता पिता को यह कहकर निकले है कि शिक्षा के मंदिर में पढ़ने के लिए जा रहे है।
लेकिन स्कूल आने के बाद पता चला कि प्रधान पाठक और मैडम उनको झाड़ू और कचरे का डिब्बा लेकर सफाई करवाने लग गई है।

बच्चो की पढ़ाई की जगह हो रही है सफाई

स्कूल में वैसे तो बच्चे पढ़ने के लिए जाते है ताकि पढ़ लिखकर कुछ बन सके।लेकिन इस तरह की सफाई और झाड़ू लगाने का काम करने से पढ़ाई की क्या उम्मीद की जा सकती है।जहां पर मैडम खुद खड़ी है और झाड़ू लगवा रही है।मासूम बच्चे पूरे स्कूल में सफाई करने जुटे हुए है।

सफाई कर्मियों की हड़ताल का असर बच्चों पर,लेकिन मासूमों से सफाई क्यों करवाना

सूत्र बता रहे है कि लंबित मांगो को लेकर सफाई कर्मी हड़ताल पर चले गए है।जिसके कारण स्कूलों में गंदगी और बदबू का आलम बना हुआ है।लेकिन सफाई कर्मियों की हड़ताल में जाने से स्कूली बच्चों को मोहरा बनाकर काम करवाया जा रहा है।जबकि यह जिम्मेदारी खुद प्रधान पाठक और शिक्षक की होती है लेकिन कछार में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है बल्कि मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ की जा रही है।

बोलती है तस्वीरें,की कैसे प्रधान पाठक और मैडम के करवाया काम

कछार के संकुल केंद्र में मौजूद यह सफाई अभियान नहीं है बल्कि प्रधान पाठक और मैडम सफाई करवाने के लिए बच्चो को लगा दिए है।इसी कारण बच्चे पढ़ाई से ज्यादा सफाई अभियान में ध्यान दे रहे है।

एक हाथ में झाड़ू और एक में कचरे का डिब्बा

यह एक तस्वीरें आप खुद गौर से देखिए इसमें आपको मासूम बच्चे एक हाथ में झाड़ू और एक हाथ में कचरे का डिब्बा नजर आएगा।जिसे देखकर आप खुद हैरान रह जाएंगे कि वाकई में किस तरह से इन बच्चों से काम करवाया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *