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सरकारी शिक्षक बने राजनीति के पोस्टर बॉय — सिविल सेवा आचरण नियम 1965 की अनदेखी पर प्रशासन मौन”

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में सरकारी शिक्षकों द्वारा खुलेआम छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और शिक्षक संवर्ग सेवा नियमों को ठेंगा दिखाने का मामला सामने आया है। शिक्षक, जो संविधान के मुताबिक पूरी तरह निष्पक्ष और राजनीतिक तटस्थ रहने की शपथ लेते हैं, अब मंत्री और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़े-बड़े पोस्टरों और विज्ञापनों में चमकते नजर आ रहे हैं। यह सिर्फ एक तस्वीर का मामला नहीं, बल्कि सरकारी सेवा की गरिमा और निष्पक्षता पर सीधा प्रहार है।

ताजा मामला सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन जिला इकाई गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से जुड़ा है, जिसमें कार्यकारी जिलाध्यक्ष पीयूष गुप्ता, जिला महासचिव अजय चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष गौरेला अमिताभ चटर्जी, ब्लॉक अध्यक्ष पेंड्रा ओमप्रकाश सोनवानी, जिला उपाध्यक्ष सुपेत मराबी, जिला सहसचिव संजय सोनी और कोषाध्यक्ष विनय कुमार राठौर समेत कई पदाधिकारियों के चेहरे मंत्री व राजनीतिक नेताओं के साथ एक ही मंच पर और प्रचार सामग्रियों में छपे हुए मिले हैं। इन तस्वीरों के जरिए यह साफ संकेत जाता है कि शिक्षक संवर्ग के ये पदाधिकारी किसी खास राजनीतिक व्यक्ति या दल के प्रचार-प्रसार में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 5 में साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी सरकारी सेवक किसी भी राजनीतिक दल का सदस्य नहीं होगा, किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेगा और न ही किसी चुनावी प्रचार में हिस्सा लेगा। साथ ही, सरकारी सेवक अपने पद, अधिकार या प्रभाव का उपयोग किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं करेगा। इसके बावजूद जिले में सरकारी शिक्षक इन नियमों की खुलेआम अवहेलना करते हुए नजर आ रहे हैं, और प्रशासन खामोश है।

यह चुप्पी संदेह को और गहरा करती है कि कहीं इस मामले में राजनीतिक संरक्षण का हाथ तो नहीं। सवाल उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर अब तक इस मामले में संज्ञान क्यों नहीं ले रहे। क्या सरकारी शिक्षकों को राजनीतिक मंचों पर चमकने की खुली छूट मिल चुकी है? या फिर चुनावी नजदीकियों के चलते नियम-कानून सिर्फ कागजों में ही कैद रह जाएंगे?

लल्लन गुरु न्यूज की मांग है कि दोषी शिक्षकों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो और विभागीय जांच शुरू की जाए, ताकि सरकारी सेवा को राजनीतिक रंग देने वालों पर लगाम कसी जा सके।

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