मितानिन दिवस पर बिलासपुर में चुनरी सी सम्मान—सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मितानिनों का अभिनंदन

मानदेय बढ़ाने की मांग तेज—24 घंटे सेवा देने वाली मितानिनों ने फिर दोहराई अपनी आवाज…..
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में आज मितानिन दिवस पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। बिलासपुर जिले के शहरी इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में उन मितानिनों को सम्मानित किया गया, जो मातृ और शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीकाकरण, पोषण और जागरूकता तक—हर मोर्चे पर समुदाय की पहली स्वास्थ्य प्रहरी बनकर खड़ी रहती हैं। तालापारा क्षेत्र के वार्ड 22 से 28 तक की सभी मितानिनों को पार्षद शेख नज़रुद्दीन ने आज विशेष रूप से सम्मानित किया। लेकिन इसी सम्मान के बीच एक पुरानी मांग आज फिर तेज़ हो गई—और वह है मानदेय बढ़ाने की…..
बता दे मितानिन कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है। ये मितानिनें जन्म से लेकर बच्चे के पांच साल के होने तक 24 घंटे सेवा देने का जिम्मा निभाती हैं। गांव और शहर की गलियों में घर–घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना, पोषण की समझ बढ़ाना, टीकाकरण सुनिश्चित करना, बीमारी की रोकथाम के लिए जागरूक करना—इनकी जिम्मेदारियां अनगिनत हैं। इसके बावजूद मितानिनों का मानदेय बेहद कम है, जिससे उनके समर्पण और मेहनत के अनुपात में आर्थिक सहयोग का सवाल लगातार उठता रहा है। आज के आयोजन में भी मितानिनों ने यही मांग एक बार फिर दोहराई कि उनके मानदेय में तत्काल बढ़ोतरी की जाए।बिलासपुर में हुए सम्मानों ने मितानिनों के मनोबल को जरूर बढ़ाया, लेकिन उनकी वास्तविक उम्मीद बेहतर सुविधाओं और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। तालापारा में पार्षद शेख नज़रुद्दीन द्वारा सभी मितानिनों को सम्मानित किए जाने से कार्यक्रम में उत्साह का माहौल दिखा, पर साथ ही यह भी साफ था कि लंबे समय से बिना रुके सेवा देने वाली ये महिलाएं अब अपनी भूमिका के अनुरूप मानदेय की हकदार हैं। समुदाय की सेहत सुधारने में उनकी भूमिका जितनी अहम है, उतना ही जरूरी है कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे, ताकि मितानिन कार्यक्रम और अधिक मजबूत रूप में आगे बढ़ सके।