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आईएएस अजीत वसंत–ननकीराम कंवर विवाद में कमिश्नर की जांच पूरी

रिपोर्ट सरकार को सौंपी – अब सरकार के कदम पर टिकी निगाहें

बिलासपुर।कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों पर चल रही विभागीय जांच आखिरकार पूरी हो गई है। राज्य सरकार के निर्देश पर बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन ने 14 अलग-अलग बिंदुओं पर 54 दिनों तक जांच की और विस्तृत रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट सौंपते ही अब इस पूरे विवाद का निर्णय सरकार के हाथों में आ गया है। कंवर ने कहा है कि वह रिपोर्ट की प्रति सूचना के अधिकार के माध्यम से प्राप्त करेंगे, क्योंकि अभी तक उन्हें इसकी कॉपी नहीं दी गई है।

कोरबा जिले से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में ननकीराम कंवर ने आरोप लगाया था कि कलेक्टर अजीत वसंत ने डीएमएफ और अन्य सरकारी योजनाओं के संचालन में गंभीर अनियमितताएं की हैं। यह मामला तब और चर्चाओं में आया जब कंवर विरोध प्रदर्शन के लिए रायपुर पहुंचे थे, लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें नजरबंद कर दिया था। इसके बाद शासन ने शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर कमिश्नर को जांच अधिकारी नियुक्त किया। संभागायुक्त सुनील जैन ने एक-एक बिंदु पर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तैयार की, हालांकि रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले हैं, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

ननकीराम कंवर ने पुष्टि की है कि उन्हें केवल इतना बताया गया है कि रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है, पर उसकी सामग्री उनसे साझा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि चूंकि रिपोर्ट उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई, इसलिए वे सूचना के अधिकार के तहत इसकी प्रति मांगेंगे ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों में क्या पाया गया और क्या नहीं। कंवर का कहना है कि यह रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि कोरबा जिले से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले पर पारदर्शिता आ सके। प्रशासनिक गलियारों में भी अब इस बात को लेकर उत्सुकता है कि रिपोर्ट पर सरकार आगे कौन-सा कदम उठाएगी, क्योंकि जांच पूरी होते ही फैसला अब पूरी तरह शासन पर निर्भर है। इस विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य इससे पहले भी सामने आ चुका है। पूर्व मंत्री ने कलेक्टर अजीत वसंत की पत्नी, डॉक्टर रूपल के खिलाफ भी आरोप लगाए थे कि उन्होंने बिना ड्यूटी किए वेतन आहरित किया। लेकिन इस शिकायत की जांच में सभी आरोप निराधार साबित हुए थे। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि डॉक्टर रूपल ने पिछले 12 महीनों में 623 ऑपरेशन किए थे, हर महीने करीब 200 मरीजों को ओपीडी में परामर्श दिया था और 72 आपातकालीन ड्यूटी भी की थीं। इन तथ्यों के आधार पर जांच समिति ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ की गई शिकायतें गलत और तथ्यहीन थीं।

अब जब कलेक्टर अजीत वसंत के खिलाफ 14 बिंदुओं वाली रिपोर्ट सरकार तक पहुंच गई है, राज्य शासन इसकी विस्तृत समीक्षा करेगा और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक बिरादरी में इस रिपोर्ट को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, और सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या निर्णय लेती है।

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