ट्रेन हादसे में प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आने के बाद बड़ा एक्शन सीनियर डीओपी हटाए गए
बिलासपुर ।ट्रेन हादसे की सीएसआर जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद कई खामियां सामने आने पर सीनियर डीओपी ( वरिष्ठ विद्युत अभियंता ऑपरेशनल) मसूद आलम को हटा दिया गया है। उनकी जगह शशांक कोष्टा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि सीआरएस की फाइनल जांच रिपोर्ट में और कई अफसरों पर गाज गिरेगी।
दरअसल लालखदान के पास मेमू–मालगाड़ी टक्कर में दर्जन भर यात्रियों की मौत और बीस यात्रियों के घायल होने के मामले में हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आते ही सीनियर डीईई ओपी (ऑपरेशनल) वरिष्ठ विद्युत अभियंता मसूद आलम को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब सीनियर डीईई (टीआरएस) ट्रेक्शन रोलिंग स्टोक शशांक कोष्टा को नए सिरे से ऑपरेशनल जिम्मेदारी सौंपी गई है। इधर मसूद आलम को शशांक कोष्टा का पुराना विभाग—सीनियर डीईई (टीआरएस)—संभालने की नियुक्ति मिली है। हादसे के तुरंत बाद उन्हें फोर्स लीव पर भेज दिया गया था और उनके अवकाश के दौरान सीनियर टीआरडी को अंतरिम प्रभार दिया गया था। इस फेरबदल ने पूरे रेलवे मंडल में खलबली मचा दी है।
गौरतलब है कि 4 नवंबर को गतौरा और लालखदान स्टेशन के बीच एक भीषण हादसा हुआ था। गेवरा रोड–बिलासपुर मेमू एक खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई थी, जिससे मेमू का इंजन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया। इस टक्कर में लोको पायलट विद्यासागर सहित 12 लोगों की मौत हुई, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने सीआरएस की विशेष जांच कराई। चार सदस्यीय दल के साथ सीआरएस बी.के. मिश्रा बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और 30 से ज्यादा कर्मचारियों व अधिकारियों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह साफ तौर पर सामने आया कि दुर्घटना ट्रेन संचालन की गंभीर चूक का परिणाम थी। सबसे बड़ा तथ्य यह कि जिस लोको पायलट को मेमू चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह मनोवैज्ञानिक (साइको) टेस्ट में पास नहीं हुआ था, इसके बावजूद उसे ट्रेन संचालन में लगा दिया गया।
चालकों की ड्यूटी तय करने का अधिकार वरिष्ठ विद्युत अभियंता (ऑपरेशनल) के पास होता है, इसी वजह से जांच रिपोर्ट आने के बाद सीधे ऑपरेशनल विंग पर कार्रवाई की गई है।
सीआरएस की फाइनल रिपोर्ट में और नाम आ सकते हैं:–
अभी केवल प्रारंभिक निष्कर्ष जारी हुए हैं। फाइनल रिपोर्ट आने पर कई और अधिकारियों की भूमिका कठघरे में आ सकती है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह सिर्फ एक चालक की गलती नहीं थी, बल्कि सिग्नलिंग, तकनीकी निगरानी, ड्यूटी असाइनमेंट और सुरक्षा प्रोटोकॉल—चारों स्तरों पर चूक हुई। सिग्नल ओवरशूट, साइको टेस्ट की अनदेखी और मॉनिटरिंग सिस्टम की कमजोरी जैसे बिंदुओं पर अंतिम रिपोर्ट में विस्तृत जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।
हादसे से जुड़े कई अधिकारी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। रेलवे मंडल में इस रिपोर्ट को लेकर गहरी चिंता और हलचल बनी हुई है।