अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर डॉ. स्वाती जाजू को ‘मातृभाषा रत्न’ मानद उपाधि

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (21 फरवरी) के पावन अवसर पर साहित्य एवं शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्ती डॉ. स्वाती जाजू को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान हेतु ‘मातृभाषा रत्न’ मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान मातृभाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं उसके शैक्षणिक विकास में उनके निरंतर योगदान को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया। डॉ. जाजू एक शिक्षाविद्, लेखिका एवं कवयित्री के रूप में लंबे समय से भाषा विकास, मूल्य शिक्षा एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
उनकी प्रकाशित कृतियाँ — संघर्ष के मोती, मूल्य शिक्षा एवं जीवन कौशल तथा समावेशी शिक्षा — शिक्षा एवं समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता फैलाने का कार्य कर रही हैं। वर्तमान में वे शिक्षक शिक्षा, भाषा प्रवीणता एवं अधिगम के लिए आकलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी संपादन कार्य में सक्रिय हैं।

डॉ. जाजू का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना है, बल्कि मातृभाषा के प्रति उनके समर्पण एवं समाज में भाषाई चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में उनके सतत प्रयासों का प्रतीक भी है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मातृभाषा किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है और उसके संरक्षण के बिना समग्र विकास संभव नहीं है।
यह उपलब्धि शिक्षा एवं साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।