प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त का कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में भव्य आयोजन

बिलासपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत आज 22वीं किस्त के हस्तांतरण का गौरवशाली कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र बिलासपुर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिले के जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों का मार्गदर्शन किया।
अतिथियों का संबोधन जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी ने किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यह हस्तांतरण किसानों की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।
उप संचालक कृषि
पी.डी. हतेश्वर ने जिले के विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बिलासपुर जिले में इस किस्त के माध्यम से 20 करोड़ 18 लाख 17 लाख 20 हजार ₹ (₹20,18,17,20,000) की राशि का हस्तांतरण हो रहा है, जिससे जिले के 1 लाख से अधिक किसान सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राशि किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इससे वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ खेती से जुड़ी आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था कर पाते हैं।
कृषि स्थाई समिति
सभापति प्रतिनिधि
जागेंद्र कश्यप
ने कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों और कृषक हितैषी नीतियों पर प्रकाश डालते हुए किसानों का उत्साहवर्धन किया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख,डॉ. गीत शर्मा
ने किसानों को 22वीं किस्त के तकनीकी पहलुओं और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दिए जा रहे वैज्ञानिक सहयोग के बारे में विस्तार से बताया।
वैज्ञानिकों एवं स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति:
कार्यक्रम में संयुक्त संचालक कृषि
आर.के. राठौर
विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. अमित शुक्ला, डॉ. स्वाति शर्मा, हेमकांति बंजारे, डॉ. जयंत साहू, इंजीनियर पंकज मिंज और सुशीला सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
संचालन एवं आभार:
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. शिल्पा कौशिक मोदी द्वारा किया गया। अंत में, डॉ. एकता ताम्रकार ने उपस्थित अतिथियों, वैज्ञानिकों और लगभग 90 प्रगतिशील किसानों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
योजना के मुख्य आंकड़े:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी, असम से देशभर के 9.32 करोड़ किसानों को ₹18,640 करोड़ की राशि ट्रांसफर की।
छत्तीसगढ़ के 24.71 लाख किसानों को ₹498.83 करोड़ का लाभ मिला, जिसमें वन पट्टाधारी और विशेष पिछड़ी जनजाति के किसान भी शामिल हैं।