एनएसयूआई ने नोटों के बंडल से भरा बैग देकर नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन…

बिलासपुर।एनएसयूआई ने नेहरू नगर क्षेत्र में संचालित नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल में हो रही अनियमितता पर पुरजोर विरोध किया अभिभावकों की गाढी कमाई को दुरुपयोग कर परेशान किया जा रहा है। इस पर एनएसयूआई के अर्पित ने नोटों के बंडल से भरा बैग रखकर व्यवस्था सही करने कहा। इन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावक व छात्रों के साथ गंभीर लापरवाही कर रहा है। इस सत्र में छात्रों से सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई करवाई गई, किताबें अन्य सामग्रियां भी बाजार से खरीदी गई मगर स्कूल में इस सत्र मैं सीबीएसई लागू ही नहीं है । छात्रों को अंधकार में रख उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल की मोटी फीस सीबीएसई माध्यम बता कर ली गई थी जो कि मांग किया गया कि यह जो अवैध शुल्क लिया गया है उस वापस किया जाए। स्कूल की बिल्डिंग को तैयार कर अभिभावकों को भ्रमित कर रहा जबकि अंदर से यह पूरी तरह खोखला है। इस मौके पर युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भावेंद्र गंगोत्री, एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अर्पित केशरवानी,छात्रसंघ पूर्व उपाध्यक्ष शोहराब खान, एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजेश क्षत्रिय,जिला उपाध्यक्ष गौरव परिहार,जिला सचिव रिहान रात्रे, साहिल,अमन यादव अन्य साथी शामिल रहे।

प्रश्नावली
- जैसा कि जानकारी प्राप्त हुई है कि आपके विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया सितंबर 2024 से प्रारंभ हो गई थी, जबकि विद्यालय का संचालन अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ। आपको राज्य सरकार से मान्यता (Recognition) अगस्त 2025 में प्राप्त हुई, और तब तक आपके पास किसी भी बोर्ड का संबद्धता (Affiliation) नहीं था। आपको CBSE की संबद्धता जनवरी 2026 में प्राप्त हुई, जिसका प्रभाव सत्र 2026-27 से लागू होगा।
ऐसी स्थिति में, कृपया स्पष्ट करें कि आपने सितंबर 2024 से किस आधार पर स्वयं को CBSE पैटर्न का विद्यालय बताते हुए अभिभावकों से CBSE स्तर की फीस वसूली, उन्हें CBSE एवं स्वयं द्वारा प्रकाशित महंगी पुस्तकों की खरीद के लिए बाध्य किया तथा इस प्रकार प्रवेश लिए। कृपया इस संबंध में प्रमाण सहित स्पष्टता प्रदान करें। - पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान, विशेष रूप से कक्षा 5 के विद्यार्थियों को CBSE पैटर्न के अनुसार पढ़ाया गया, किन्तु अचानक उन्हें CG बोर्ड की परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया। यद्यपि अभिभावकों से सहमति लेने का दावा किया गया, तथापि यह स्थिति बच्चों एवं अभिभावकों के साथ धोखाधड़ी प्रतीत होती है।
जब फीस CBSE स्तर की ली गई और पुस्तकें भी उसी स्तर की थीं, तो परीक्षा एवं प्रमाणपत्र CG बोर्ड का क्यों दिया गया? यह तथ्य प्रारंभ से स्पष्ट क्यों नहीं किया गया? केवल परिस्थितियाँ प्रतिकूल होने पर ही यह जानकारी क्यों साझा की गई? - विद्यालय द्वारा प्राप्त की गई फीस एवं समस्त वित्तीय लेखा-जोखा का विवरण क्या बिलासपुर स्थित विद्यालय खाते में संधारित है, जैसा कि राज्य एवं CBSE के नियमों में अपेक्षित है? अथवा यह राशि किसी अन्य राज्य में जमा की जा रही है?
यदि आपका तर्क यह है कि “पैसा कहीं भी जमा हो, शिक्षा तो दी जा रही है”, तो भविष्य में किसी विवाद, वित्तीय अनियमितता अथवा विद्यालय के अचानक बंद हो जाने की स्थिति में अभिभावक किस राज्य, किस बैंक एवं किस खाते के माध्यम से न्याय प्राप्त करेंगे?
CBSE एवं राज्य नियमों के अनुसार प्रत्येक शाखा के लिए स्थानीय स्तर पर बैंक खाता अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता, सुरक्षा एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। फिर भी पिछले दो वर्षों (2024-25, 2025-26) तथा आगामी सत्र (2026-27) के प्रवेश शुल्क को बाहरी राज्य में क्यों स्थानांतरित किया जा रहा है? विद्यालय का स्वयं का खाता किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में क्यों नहीं है? प्रधानाचार्य की इसमें कोई भूमिका क्यों नहीं है? संचालन निधि (Operational Fund) क्यों नहीं रखी गई है?
यदि भविष्य में संस्था अचानक बंद हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इसका क्या प्रमाण एवं गारंटी उपलब्ध है? - शुल्क रसीद (Fee Receipt) पर किसके हस्ताक्षर होने चाहिए, जिससे वह वैध प्रमाण एवं गारंटी के रूप में मान्य हो? सामान्यतः यह किसी उत्तरदायी अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए।
किन्तु यदि रसीद पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति Narayana Education Society का कर्मचारी ही नहीं है, बल्कि किसी NSPIRA कंपनी का कर्मचारी है, जो केवल मानव संसाधन उपलब्ध कराती है, तो ऐसे में उस हस्ताक्षर की वैधता एवं विश्वसनीयता क्या होगी?
यदि भविष्य में संस्था यह कह दे कि “यह व्यक्ति हमारा कर्मचारी नहीं था”, तो अभिभावकों एवं छात्रों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? - यदि NSPIRA कंपनी आपकी ही संबद्ध इकाई है, तो वह यूनिफॉर्म एवं पुस्तकों की बिक्री कैसे कर रही है? यह स्पष्ट है कि एक ही तंत्र के अंतर्गत निर्माता, वितरक एवं आपूर्तिकर्ता की भूमिका निभाई जा रही है, जिसमें 7-8% कमीशन के माध्यम से उत्पादों की अनिवार्य खरीद करवाई जा रही है।
विद्यालय की वर्दी की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है, किंतु मूल्य अत्यधिक है। इसी प्रकार पुस्तकों की कीमतें भी असामान्य रूप से अधिक हैं। अभिभावकों को एकाधिकार (Monopoly) के तहत इन्हें खरीदने के लिए बाध्य क्यों किया जा रहा है?
एक गैर-लाभकारी संस्था (Non-Profit Organization) होने के बावजूद इस प्रकार का व्यावसायिक गतिविधि क्यों की जा रही है?
साथ ही, जिस कार्यालय पते को प्रस्तुत किया जा रहा है, वह एक वर्ष पूर्व ही बंद हो चुका है, जिसका किराया मार्च 2025 से ही बंद कर दिया गया था। इस प्रकार की भ्रामक जानकारी क्यों दी जा रही है?

- विद्यालय की फीस का निर्धारण किस प्रकार किया गया? क्या जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय का कोई प्रतिनिधि उपस्थित था? क्या कोई शुल्क निर्धारण समिति (Fee Regulation Committee) गठित की गई, जिसमें अभिभावक एवं शिक्षक सम्मिलित थे?
क्या प्रधानाचार्य द्वारा कोई प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिस पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया? यदि हाँ, तो कृपया उसका प्रमाण प्रस्तुत करें।
यदि नहीं, तो पिछले दो वर्षों में दो बार फीस वृद्धि का औचित्य क्या है? क्या सुविधाओं में कोई वृद्धि की गई? इतनी अधिक फीस का क्या तर्कसंगत आधार है? - आपके विद्यालय में रायपुर के विद्यार्थियों का पंजीकरण किस आधार पर किया गया है? यदि वे यहाँ पंजीकृत हैं और UDISE कोड के अंतर्गत उनके रोल नंबर भी जारी हैं, तो उनकी निरंतर अनुपस्थिति का क्या कारण है?
यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि वही विद्यार्थी किसी अन्य UDISE कोड एवं रोल नंबर के माध्यम से रायपुर शाखा में परीक्षा दे रहे हैं। यदि ऐसा है, तो यह गंभीर अनियमितता है।
क्या शैक्षणिक विभाग के नियमों की अनदेखी की जा रही है? कृपया स्पष्ट करें। - क्या आपने CBSE को भी गुमराह किया है, या क्या CBSE ने बिना आवश्यक दस्तावेजों एवं मानकों की जांच के ही आपको संबद्धता प्रदान की?
क्या आपके वित्तीय अभिलेख, ऑडिट रिपोर्ट, शुल्क निर्धारण समिति (SFFC), दिव्यांग छात्रों हेतु रैंप/लिफ्ट, विशेष शिक्षक (Special Educator), वेलनेस ट्रेनर, कक्षा 9-12 हेतु मानक खेल मैदान एवं प्रयोगशालाओं की व्यवस्था का निरीक्षण किया गया? यदि नहीं, तो संबद्धता कैसे प्रदान की गई? - यह जानकारी प्राप्त हुई है कि राज्य सरकार से मान्यता अगस्त 2025 में प्राप्त हुई, जबकि स्थानीय राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति का गठन जनवरी 2026 में किया गया।
बिना समिति के गठन के मान्यता प्राप्त होना कैसे संभव है? क्या इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है?
साथ ही, समिति का गठन वेतनभोगी कर्मचारियों के साथ किया गया है, जो नियमों के विपरीत है। न तो उनका निर्वाचन हुआ और न ही कोई स्वतंत्र खाता खोला गया।
यदि आपके अनुसार राष्ट्रीय स्तर की पंजीकृत संस्था (Narayana Education Society) पर्याप्त है, तो स्थानीय समिति की आवश्यकता क्यों बताई जाती है?
यदि विद्यालय के पास स्वयं की भूमि, भवन एवं स्थानीय खाता नहीं है, तो उसके अचानक बंद होने की स्थिति में इसकी गारंटी एवं जिम्मेदारी कौन लेगा? कृपया इसे लिखित में प्रदान करें। - यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि कर्मचारियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र नियुक्ति के समय “गारंटी” के रूप में रख लिए जाते हैं। क्या यह राज्य एवं CBSE नियमों तथा मानवाधिकारों के अनुरूप है?
यह स्पष्ट रूप से उत्पीड़न एवं शोषण की श्रेणी में आता है। कृपया इस पर स्पष्ट उत्तर दें तथा कर्मचारियों से भी इस विषय में पुष्टि करवाई जाए। - यह जानकारी भी प्राप्त हुई है कि NSPIRA कंपनी छत्तीसगढ़ के Shop and Establishment Act के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है।
यदि ऐसा है, तो यह भी स्पष्ट है कि प्रशासनिक एवं विपणन (Admin & Marketing) कर्मचारी NSPIRA के पेरोल पर हैं, जिनकी राज्य में कोई नियामक संस्था नहीं है। उनके ESI एवं PF का योगदान अन्य राज्य में किया जा रहा है।
ऐसी स्थिति में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो क्या कर्मचारी को अपने अधिकारों के लिए दूसरे राज्य में जाकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा? यह कर्मचारियों के अधिकारों के साथ अन्याय क्यों है?

- आपके विद्यालय में हाउसकीपिंग, बस स्टाफ एवं सुरक्षा कर्मी सभी आउटसोर्स हैं। क्या आप संबंधित विक्रेता (Vendor) से उनके PF एवं ESI के प्रमाण अपने अभिलेख में रखते हैं?
क्या सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) उपलब्ध है? यदि हाँ, तो कृपया प्रस्तुत करें।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि भविष्य में कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
कर्मचारियों के निरंतर परिवर्तन के कारण, क्या वर्तमान कर्मचारियों का अद्यतन उपस्थिति रजिस्टर एवं उनके प्रमाण उपलब्ध हैं? कृपया स्पष्ट करें। समापन / सत्यापन कथन
हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ के बच्चों एवं अभिभावकों की शिक्षा, सुविधाओं, सुरक्षा, उनके आर्थिक हितों की रक्षा करना तथा उन्हें किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाना है।
साथ ही, हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी शैक्षणिक संस्थान निर्धारित नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अनुरूप संचालित हों।
सत्यापन हेतु यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी ऐसी कई संस्थाएं प्रदेश में संचालित हुई हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के अभिभावकों एवं सामान्य जनमानस को भ्रमित कर, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और तत्पश्चात अचानक संचालित होना बंद कर दिया।
अतः उपर्युक्त तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में आवश्यक सतर्कता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता, शोषण या धोखाधड़ी की स्थिति उत्पन्न न हो।