सात दिवसीय एनएसएस विशेष शिविर का भव्य समापन: ग्राम विकास, जागरूकता और व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त मंच

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा ग्राम-रामनगर कछार, विकासखंड-बिल्हा, जिला-बिलासपुर में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन दिनांक 31 मार्च 2026 को उत्साह, उल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह शिविर ग्रामीण विकास, सामाजिक जागरूकता एवं स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न रचनात्मक एवं जनहितकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज सेवा की भावना को सशक्त किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय बिलासपुर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्राम कछार के प्रगतिशील कृषक श्री स्वप्निल अग्रवाल एवं डॉ. आर.के.एस. तोमर, प्रमुख वैज्ञानिक की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वयंसेवक आद्या तिवारी, किरण वर्मा, तेजस्विनी एवं संध्या द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया।
अतिथियों का स्वागत स्वयंसेवक दल नायिका ईशा पटेल, दलनायक गौतम एवं तनय द्वारा एनएसएस बैज एवं कैप पहनाकर किया गया, जो अनुशासन एवं संगठन की भावना का प्रतीक रहा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्य गीत ने उपस्थित जनसमूह में जोश एवं प्रेरणा का संचार किया। आद्या तिवारी, किरण वर्मा, ईशा पटेल, तेजस्विनी एवं संध्या की प्रस्तुति ने एनएसएस के मूल उद्देश्यों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।

सात दिवसीय विशेष शिविर का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए स्वयंसेविका स्तुति गुप्ता ने शिविर के दौरान आयोजित गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शिविर के अंतर्गत स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण कार्य, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति अभियान, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता, ग्राम भ्रमण, घर-घर संपर्क, एवं विभिन्न सामाजिक विषयों पर रैलियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल ग्रामवासियों को जागरूक किया गया, बल्कि स्वयंसेवकों को व्यवहारिक ज्ञान एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुभव भी प्राप्त हुआ।
दलनायक गौतम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह शिविर उनके लिए जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जिसने उन्हें नेतृत्व, समय प्रबंधन एवं टीम वर्क की वास्तविक सीख दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवेश में कार्य करते हुए उन्होंने समाज की वास्तविक समस्याओं को समझा और उनके समाधान के प्रति जागरूकता विकसित की।
स्वयंसेविका सौम्या सैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस शिविर ने उनके भीतर सेवा भावना, संवेदनशीलता एवं आत्मविश्वास को और अधिक सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि एनएसएस के माध्यम से उन्हें समाज के लिए कुछ करने का अवसर मिला, जो उनके जीवन में सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री स्वप्निल अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के शिविर ग्रामीण समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि युवा शक्ति यदि सकारात्मक दिशा में कार्य करे तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है।
डॉ. आर.के.एस. तोमर ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि संस्कारित एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने का माध्यम है। उन्होंने स्वयंसेवकों द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें भविष्य में भी समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. चौरे ने अपने संबोधन में कहा कि सात दिनों का यह शिविर स्वयंसेवकों के जीवन में अमूल्य अनुभव जोड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक चेतना का विकास करती हैं। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर सात दिवसीय विशेष शिविर को सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सभी स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र प्राप्त करते समय स्वयंसेवकों के चेहरे पर उत्साह एवं गर्व स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी अजीत विलियम्स ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह शिविर केवल सात दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन भर के लिए सीख और अनुभव देने वाला एक सशक्त माध्यम रहा है। उन्होंने ग्राम पंचायत, ग्रामवासियों, महाविद्यालय प्रशासन, सहयोगी स्टाफ एवं सभी स्वयंसेवकों का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे “मैं नहीं, आप” के मूल मंत्र को अपने जीवन में अपनाते हुए समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान हेतु निरंतर कार्य करते रहें।
शिविर के दौरान भोजन व्यवस्था का सफल संचालन स्वयंसेवक मंजू, संध्या, देवेंद्र, कैलाश, उदित एवं सुमन द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित एवं जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया गया, जो शिविर की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समापन कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारीगण, ग्रामवासी एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग से यह शिविर अत्यंत सफल, प्रेरणादायक एवं यादगार बन गया।