Blog

एरमशाही धान खरीदी केंद्र में धांधली का खुलासा: खाली ट्रक में बारदाना लोड, 90 घंटे खड़ा रहा, अफसरों को जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं

बिलासपुर,।मस्तूरी विकासखंड के एरमशाही धान खरीदी केंद्र में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए स्थानीय किसानों ने खाद्य विभाग के ‘क्लीनचिट’ दावे का खंडन किया है। किसानों का आरोप है कि इस केंद्र में प्रबंधक से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक की मिलीभगत से धांधली चल रही है।

खाली ट्रक कांड: 90 घंटे तक खड़ा रहा खरीदी केंद्र में
कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने एरमशाही केंद्र में एक खाली ट्रक को रोक लिया था। ग्रामीणों का आरोप है कि संस्था प्रबंधक बबलू घृतलहरे द्वारा 72 और 94 क्विंटल धान का बिना वास्तविक धान तौले, केवल खाली बारदाना ट्रक में लोड कर भेजा जा रहा था। शक होने पर ग्रामीणों ने ट्रक को रुकवा दिया।

यह ट्रक लगभग 90 घंटे तक खरीदी केंद्र में खड़ा रहा। इस घटना की जानकारी तत्काल डीआर जयसवाल, खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, नोडल अधिकारी आशीष दुबे और ब्रांच मैनेजर सुशील पनौरे को दी गई थी।

अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप
किसानों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना की जानकारी देने के बाद भी किसी भी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर जांच या कार्रवाई नहीं की। इससे साफ लगता है कि एरमशाही में चल रही धांधली में इन सभी अधिकारियों की मिलीभगत है।

आरोपों के घेरे में ये अधिकारी:
बबलू घृतलहरे, संस्था प्रबंधक
डीआर जयसवाल
अमृत कुजूर, खाद्य नियंत्रक
आशीष दुबे, नोडल अधिकारी, बिलासपुर
सुशील पनौरे, ब्रांच मैनेजर

प्रशासन का दावा vs जमीनी हकीकत
खाद्य विभाग का दावा है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में पूरे जिले में केवल 215 क्विंटल धान का अंतर है और फर्जीवाड़े की पुष्टि नहीं हुई है। जबकि खाली ट्रक की घटना विभाग के दावों की पोल खोलती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एरमशाही केंद्र शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है और प्रबंधक, फड़ प्रभारी, प्राधिकृत अधिकारी सबकी मिलीभगत से यहां धांधली हो रही है।

मुख्य मांग: CBI या केंद्रीय एजेंसी से जांच हो
चूंकि इस मामले में संस्था प्रबंधक बबलू घृतलहरे के साथ-साथ डीआर जयसवाल, खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, नोडल अधिकारी आशीष दुबे और ब्रांच मैनेजर सुशील पनौरे के नाम सामने आ रहे हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।

किसान संगठनों ने मांग की है कि एरमशाही और गतोरा समितियों में पिछले पांच वर्षों के पूरे रिकॉर्ड की जांच CBI, EOW या किसी केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए ताकि सभी दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका उजागर हो सके।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करेंगे!

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *