ई-चालान की अवैध प्रक्रिया की शिकायत भू तल परिवहन मंत्री से..संघ बोला,चालान में एक निश्चित राशि अंकित कर सीधे आम जनता से वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है।

देश में वर्तमान में जारी ई-चालान की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए
बिलासपुर।पूरे देश में वाहनों के विरुद्ध किए जा रहे ई-चालान की अवैध प्रक्रिया के संबंध में शिकायत तथा ऑनलाईन चालान की प्रक्रिया समाप्त किये जाने व पूर्व में किये गये बिना सुनवाई का अवसर दिये ऑनलाईन चालान को निरस्त करने की मांग भू तल मंत्री नितिन गडकरी से छत्तीसगढ यातायात महासंघ की ओर से किया गया है इस संबंध में शिकायत पत्र में कहा गया है कि देश में विभिन्न प्रकार के यातायात के साधन प्रचलित हैं, जिनमें यात्री वाहन बस, टैक्सी, ऑटो, ट्रैवलर, मालवाहक वाहन ट्रक आदि तथा व्यक्तिगत उपयोग के वाहन टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर भी शामिल हैं। गत 05 वर्षों से यह देखा जा रहा है कि परिवहन विभाग एवं ट्रैफिक पुलिस द्वारा चलती वाहनों के पीछे से फोटो लेकर ई-चालान जारी किया जा रहा है। उक्त चालान में एक निश्चित राशि अंकित कर सीधे आम जनता से वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है।

यह प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के प्रतिकूल है, जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को दंडित करने से पूर्व उसे सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया जाना आवश्यक है। वर्तमान में बिना किसी पूर्व सूचना अथवा सुनवाई के, विभिन्न आधारों जैसे
ड्राइविंग लाइसेंस ,बीमा समाप्त होनासफिटनेस प्रमाण पत्र,परमिट संबंधी त्रुटियाँ,चालक की वर्दी,चलती यात्री बसों में ओवर सीट होना,तीव्र गति से वाहन संचालन
अन्य कथित ट्रैफिक उल्लंघन के नाम पर सीधे ई-चालान जारी कर दिया जाता है। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि, इन ई-चालानों की प्रतियां सीधे घर भेजी जाती हैं तथा लगातार भुगतान हेतु संदेश भी प्रेषित किए जाते हैं, जिससे आम नागरिक मानसिक एवं आर्थिक दबाव में आ जाता है।
वर्तमान में, इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए अनेक फर्जी वेबसाइट एवं लिंक भी सक्रिय हो गए हैं, जिनके माध्यम से आम जनता के साथ ठगी की घटनाएं हो रही हैं। कई मामलों में लिंक क्लिक करते ही लोगों के बैंक खातों से धनराशि अवैध रूप से निकाल ली गई है, जो अत्यंत गंभीर विषय है।
पूरे देश में जहां कहीं भी यात्री बसें संचालित हैं वहां पर यात्री बस जिस-जिस राज्य से गुजरती हैं उन-उन राज्यों के परिवहन व यातायात अधिकारियों तथा मार्ग के पुलिस थानों के द्वारा ऑनलाईन चालान किया जाता है, अंर्तप्रांतीय यात्री बसें प्रतिदिन लगभग 5-7 हजार रूपये का ऑनलाईन चालान प्राप्त करती है जिससे बस संचालन का व्यवसाय अलाभप्रद हो गया है। यदि इसी प्रकार ऑनलाईन चालान होता रहा तो बसे बंद हो जायेगी तथा इस कारण आम जनता को अपने प्रदेश में व अन्य प्रदेशों में यात्रा करने से वंचित होना पडेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है कि बिना सुनवाई का अवसर प्रदान किए किसी भी व्यक्ति को दंडित नहीं कियाजाना चाहिए। इसके बावजूद देशभर में ई-चालान की यह प्रक्रिया निरंतर जारी है।हमने सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकारों से यह जानकारी मांगी कि ई-चालान किस विधिक प्रावधान के तहत किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 का उल्लेख किया गया। राज्य शासन (छत्तीसगढ़) द्वारा केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 2 (ग क) का हवाला दिया गया। परंतु उक्त नियमों का गहन अध्ययन करने पर यह स्पष्ट हुआ कि इनमें कहीं भी ई-चालान जारी करने का स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध नहीं है। इससे यह प्रतीत होता है कि बिना विधिक आधार के मनमाने ढंग से ई-चालान जारी किए जा रहे हैं। इसलिए
पूरे देश में वर्तमान में जारी ई-चालान की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। बिना सुनवाई के जारी किए गए समस्त ई-चालानों को निरस्त किया जाए।इस संबंध में स्पष्ट एवं विधिसम्मत नियमावली जारी की जाए जिसमें यह स्पष्ट प्रावधान बनाया जाये की बिना सुनवाई अवसर दिये पूरे देश में किसी भी वाहन स्वामी के विरूद्ध जुर्माना व पेनाल्टी नहीं लगाया जाये।1 अप्रैल, 2026 से ऐसा नियम बनाया गया है कि पहले ई-चालान की राशि पटायी जाये तभी यात्री बस या अन्य वाहन का परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, व कर जमा का कार्य होगा। निवेदन है कि सर्वप्रथम इस नियम पर त्वरित रोक लगायी जाये।फर्जी वेबसाइट एवं ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाने के लिए सख्त कार्यवाही की जाए।
विधिक आधार पर उठे गंभीर सवाल
पत्र में सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारियों का हवाला देते हुए ई-चालान की वैधता को चुनौती दी गई है। केंद्र सरकार ने इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167 का उल्लेख किया है। वहीं छत्तीसगढ़ शासन ने नियम 2 (ग क) का हवाला दिया है। महासंघ का दावा है कि इन नियमों का गहन अध्ययन करने पर कहीं भी ई-चालान जारी करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं मिलता। महासंघ ने इसे नियमों की गलत व्याख्या और बिना विधिक आधार किया जा रहा मनमाना कार्य बताया जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सुनवाई के अधिकार के सिद्धांतों के विपरीत है।
फर्जी लिंक से खाली हो रहे बैंक खाते
ई-चालान की आड़ में सक्रिय साइबर अपराधियों की ओर भी केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित किया गया है। वर्तमान में ई-चालान के नाम पर अनेक फर्जी वेबसाइट्स और लिंक सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। अनपढ़ और कम जागरूक वाहन स्वामी जैसे ही इन फर्जी लिंक पर. क्लिक करते हैं, उनके बैंक खातों से जमा राशि अवैध रूप से निकाल ली जाती है। महासंघ ने कहा कि आधिकारिक प्रक्रिया की जटिलता और पारदर्शिता के अभाव के कारण आम जनता इन ठगों का आसानी से शिकार बन रही है, जिससे इस पूरी डिजिटल चालान व्यवस्था पर ही प्रश्नचिन्ह लग गया है।
पहले चालान भरो, फिर पेपर बनवाओ का विरोध
महासंघ ने विशेष रूप से 1 अप्रैल, 2026 से लागू किए गए उस नियम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, जिसके तहत ई-चालान की राशि जमा किए बिना वाहन का फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र या कर जमा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। महासंघ का कहना है कि यह नियम वाहन स्वामियों की घेराबंदी करने जैसा है। गडकरी से मांग की गई है कि एक स्पष्ट नियमावली बनाई जाए, जिसमें बिना सुनवाई के जुर्माना लगाया जाए और फर्जी वेबसाइटों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि परिवहन क्षेत्र को इस डिजिटल आतंक से राहत मिल सके। आलम यह है कि एक बस पर प्रतिदिन 5 से 7 हजार रुपए तक का ऑनलाइन जुर्माना लग रहा है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि यह न प्रक्रिया नहीं रुकी तो बसें बंद हो जाएंगी, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।