कुकुर्दीकला में नए रेत घाट खोलने का विरोध तेज, ग्रामीणों में उबाल — अब और बर्दाश्त नहीं

बिलासपुर।कुकुर्दीकला क्षेत्र में नए रेत घाट खोलने की तैयारी ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पहले से संचालित उदयबंद और अमलडीह रेत घाटों से परेशान ग्रामीण अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं। उनका साफ कहना है — “अब और रेत घाट नहीं चाहिए।”
ग्रामीणों का आरोप है कि रेत से भरे भारी वाहन दिन-रात 24 घंटे गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि चलना भी मुश्किल हो गया है और आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिन सड़कों को भारी वाहनों से नुकसान पहुंचाया जाता है, उनके सुधार के लिए रेत घाट संचालकों द्वारा मुरुम डालकर समतलीकरण तक नहीं किया जाता।
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि रेत परिवहन करने वाले ट्रकों में तिरपाल नहीं लगाए जाते, जिससे उड़ती धूल सीधे राहगीरों की आंखों में जाती है और लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक बन गई है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि नदी में गहराई तक अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर कुकुर्दीकला में नया रेत घाट खोला गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि पहले से चल रहे घाटों की समस्याएं ही खत्म नहीं हो रही हैं, ऐसे में नए घाट खोलना सीधे-सीधे ग्रामीणों की परेशानियों को बढ़ाना है।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस बढ़ते आक्रोश पर क्या कदम उठाता है, या फिर ग्रामीणों को अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।