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आम है पीला और चमकदार…..तो हो जाएं सावधान

जागरूकता ही बचाव है

बिलासपुर- खरीद रहे हैं पके हुए आम, तो हो जाएं सावधान क्योंकि शुरुआती आवक में ही केमिकल की मदद से आम का पकाया जाना चालू हो चुका है। इसलिए वानिकी वैज्ञानिकों ने पहचान के आसान उपायों की जानकारियां साझा की हैं।

फलों का राजा आम, अब बाजार पहुंच चुका है। शुरुआती दौर में कीमत भले ही तेज मानी जा रही है लेकिन खरीदी के बढ़ते रुझान को देखते हुए वानिकी वैज्ञानिकों ने सतर्कता के साथ खरीदी का आग्रह किया है। यह इसलिए क्योंकि निगरानी एजेंसियों की सतर्कता सिरे से गायब नजर आ रही है।


उपयोग इस केमिकल का

कैल्शियम कार्बाइड। मूल प्रयोग क्षेत्र है वेल्डिंग का काम। आर्सेनिक और फाॅस्फीन गैस जैसे जहरीले तत्व मानव स्वास्थ्य को बेतरह नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि इसका उपयोग अब आम को जल्दी पकाने में किया जा रहा है। इस रसायन के उपयोग से पकाए गए फलों का सेवन उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्या का वाहक बन सकता है। त्वचा में जलन और अल्सर जैसी स्वास्थ्यगत समस्याएं भी सामने आती हैं।


सुझाए यह आठ उपाय

रासायनिक रूप से पकाए गए आम की पहचान मुश्किल हो सकती है लेकिन कुछ ऐसे उपाय भी हैं, जो पहचान को आसान बना सकते हैं। वानिकी वैज्ञानिकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से पके आम का रंग असमान होता है, कुछ पीला कुछ हरा लेकिन रासायनिक रूप से पके आम पूरी तरह एक जैसा पीला और चमकदार होता है। प्राकृतिक पका हुआ आम हल्की खुशबू देता है जबकि रासायनिक आम में यह नहीं होता। नरम और गूदेदार नजर आए, तो खरीदी से बचना होगा। धब्बे नजर आए तो तय मानिए कि केमिकल का उपयोग किया गया है। स्वाद फीका और अजीब लगे तो यह भी रसायन की मदद को प्रमाणित करता है।


मौन है निगरानी एजेंसियां

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खानपान की सामग्रियों में कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग प्रतिबंधित किया हुआ है। इसके बावजूद फलों को पकाने में हो रहा उपयोग, जांच एजेंसियों की सुस्त कार्यशैली को ही उजागर करता है। वह भी तब, जब सीजन की आवक और डिमांड निकली हुई है। इसे देखते हुए वानिकी वैज्ञानिकों ने अपनी तरफ से कुछ ऐसे उपाय सुझाए हैं, जिसकी मदद से उपभोक्ता ऐसे फलों की खरीदी से बच सकेंगे।

वर्जन

चमकदार आम से रहे सावधान

कैल्शियम कार्बाइड से पकाए गए आमों में आर्सेनिक और फॉस्फीन जैसी जहरीली गैसें होती हैं, जो पेट, लिवर और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे आमों में पोषक तत्व भी कम हो जाते हैं। प्राकृतिक रूप से पके आम हल्की खुशबू और असमान रंग वाले होते हैं, जबकि केमिकल वाले आम एकसार पीले और चमकदार दिखते हैं। उपभोक्ताओं को सजग रहकर ही फल खरीदना चाहिए।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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