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विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत गांव-गांव पहुंच रहे कृषि वैज्ञानिक

आधुनिक तकनीकों, जलवायु-स्मार्ट कृषि और कृषि वानिकी की जानकारी से किसानों को किया जा रहा जागरूक

बिलासपुर। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर, कृषि विज्ञान केंद्र तथा कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से जिले में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का सफल संचालन किया जा रहा है। यह अभियान क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस. के. वर्मा, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गीत शर्मा तथा उप संचालक कृषि, बिलासपुर श्री पी. डी. हतेश्वर के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। यह अभियान 5 मई 2026 से प्रारंभ होकर 20 मई 2026 तक जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित किया जा रहा है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों, जलवायु-अनुकूल खेती, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, कृषि वानिकी तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है, ताकि किसान बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप अपनी खेती को अधिक उत्पादक, लाभकारी और टिकाऊ बना सकें।

कोटा विकासखंड में प्रतिदिन आयोजित हो रहे प्रशिक्षण शिविर

अभियान के अंतर्गत बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में प्रतिदिन प्रशिक्षण एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में कृषि वैज्ञानिक सीधे किसानों के बीच पहुंचकर खरीफ फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कृषि यंत्रीकरण तथा कृषि वानिकी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

विभिन्न ग्रामों में प्रशिक्षण देने वाले वैज्ञानिक

कोटा विकासखंड हेतु गठित वैज्ञानिक दल के सदस्यों में
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे ने ग्राम सीस, प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. टी. डी. पांडे ने ग्राम जांजराडीह, सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने ग्राम सेकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रमेंद्र कुमार केसरी ने ग्राम सेमरा, सहायक प्राध्यापक डॉ. यशपाल सिंह निराला ने ग्राम भैंसाझार, प्राध्यापक डॉ. अजय टेगर ने कुंवाजाती, वैज्ञानिक डॉ. अवनीत कुमार ने ग्राम अमामुड़ा, प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. आर. के. एस. तिवारी ने ग्राम पहंदा, वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने ग्राम कसईबेहरा, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गीत शर्मा ने ग्राम सरगोंड, मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस. के. वर्मा ने ग्राम नवागांव एवं वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर ने ग्राम केकराडीह में प्रशिक्षण देने का कार्य किया।

खरीफ फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों के लिए जागरूकता एवं क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें आगामी खरीफ मौसम की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ के लिए उच्च उपज देने वाली तथा जलवायु-सहिष्णु बीज किस्मों का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही बीजों को रोग एवं कीटों से सुरक्षित रखने हेतु बीज उपचार की वैज्ञानिक विधियों का प्रदर्शन किया गया।

मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को बताया गया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक पदार्थों का समुचित उपयोग और सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति आवश्यक है।

समेकित कीट प्रबंधन और जल संरक्षण उपाय

किसानों को समेकित कीट प्रबंधन के सिद्धांतों की जानकारी दी गई, जिसमें जैविक नियंत्रण, फेरोमोन ट्रैप, प्रकाश प्रपंच और आवश्यकता अनुसार सुरक्षित कीटनाशी उपयोग पर बल दिया गया।

जलवायु परिवर्तन और वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत समतलीकरण, मेड़बंदी, सूक्ष्म सिंचाई तथा नमी संरक्षण तकनीकों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।

धान के लिए जैव उर्वरक और जैविक खेती

धान उत्पादन में लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों को नील-हरित शैवाल (ब्लू ग्रीन एल्गी) के उत्पादन एवं उपयोग की तकनीक बताई गई। इसके साथ ही गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत, हरी खाद तथा अन्य जैविक पोषक स्रोतों के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया गया।

वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा समझाते हुए रासायनिक लागत घटाने और मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय बताए।

कृषि यंत्रीकरण से श्रम और लागत में कमी

उपयुक्त कृषि यंत्रों एवं उपकरणों के उपयोग पर भी विशेष जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि आधुनिक कृषि यंत्रीकरण से समय, श्रम और उत्पादन लागत में कमी आती है तथा खेती अधिक लाभकारी बनती है।

कृषि वानिकी: आय, मिट्टी और जलवायु सुरक्षा का सशक्त माध्यम

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि वानिकी के महत्व पर विशेष बल दिया गया। किसानों को बताया गया कि खेतों की मेड़ों एवं अनुपयोगी भूमि पर बहुउद्देशीय वृक्षों के रोपण से अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है। वृक्ष न केवल ईंधन, चारा, फल और लकड़ी प्रदान करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण करने, जैव विविधता संवर्धन तथा कार्बन संचयन के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शासकीय योजनाओं की जानकारी और तकनीकी सहायता

किसानों को केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न कृषि एवं वानिकी योजनाओं, अनुदान सुविधाओं तथा तकनीकी सहायता कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। उन्हें सलाह दी गई कि वे इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाकर अपनी कृषि प्रणाली को सुदृढ़ करें।

किसानों की समस्याओं का समाधान

कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें किसानों ने अपनी फसलों से संबंधित समस्याएँ वैज्ञानिकों के समक्ष रखीं। विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक समाधान सुझाए।

जलवायु-स्मार्ट कृषि की ओर प्रेरित हो रहे किसान

अभियान के माध्यम से किसानों में जलवायु-स्मार्ट कृषि, टिकाऊ खेती, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और आयवृद्धि के प्रति जागरूकता बढ़ी है। किसानों ने आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी तकनीकों को अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।

कृषि वैज्ञानिकों की पहल से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

“विकसित कृषि संकल्प अभियान” केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है। गांव-गांव पहुंच रहे कृषि वैज्ञानिकों की यह पहल न केवल कृषि उत्पादकता और मृदा स्वास्थ्य में सुधार करेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण आजीविका को भी अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाएगी।

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