तापमान अब ‘उच्च जोखिम अवस्था’ में…!
– उच्च तापमान की चार श्रेणियां पार करने के बाद अंतिम पांचवी श्रेणी में दस्तक

बिलासपुर- उच्च तापमान की चार श्रेणी पार कर लेने के बाद अब तापमान पांचवी और अंतिम श्रेणी पर पहुंच गया है। ‘उच्च जोखिम अवस्था’वाले इस तापमान की पहचान हीट स्ट्रोक के नाम से होती है।
बढ़ती कांक्रीट संरचनाएं, बढ़ते वाहन, कोलतार का अविवेकपूर्ण उपयोग और घटती हरियाली। पहली बार उच्च तापमान की चार श्रेणियों से आगे बढ़ चुका है तापमान। लगभग पूरा प्रदेश अब पांचवी और अंतिम श्रेणी में है। इसे देखते हुए ‘उच्च जोखिम अवस्था’यानी रेड अलर्ट की तैयारी में है भारतीय मौसम विज्ञान विभाग।

यह चार श्रेणी पूरी
कांक्रीट,वाहन और कम हरियाली वाले क्षेत्रों में आसपास की तुलना में अधिक तापमान बनने की स्थितियों को हीट आईलैंड के नाम से पहचाना जाता है। इसकी मदद से दूसरी श्रेणी हीट ट्रैप ने भी अपना काम पूरा कर लिया है। लंबे समय तक स्थिर तेज तापमान के रूप में रहने का। यह दोनों स्थितियां मदद कर रहीं हैं, तीसरी श्रेणी यानी हीट वेव की, जो लगातार कई दिनों तक रहती है। शरीर पर बेतरह दबाव डाल रहा है उच्च तापमान। अत्यधिक पसीना, थकान और कमजोरी लाने वाली यह स्थिति हीट स्ट्रेस के नाम से पहचानी जाती है।

दस्तक पांचवें की
उच्च तापमान ने, चार स्तर पूरा कर लिया है। पशु- पक्षियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के बाद पांचवें यानी हीट स्ट्रोक ने मानव शरीर में दस्तक दे दी है। उच्च जोखिम वाली अवस्था इसलिए क्योंकि शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र को विफल करता है हीट स्ट्रोक। लक्षण बेहोशी, भ्रम और शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाना। तापमान का जैसा स्तर बना हुआ है, उसके बाद अब रेड अलर्ट की तैयारी है।
वर्जन
तापमान अब ‘उच्च जोखिम अवस्था’ में
शहरीकरण के कारण तेजी से घटती हरियाली और बढ़ती कांक्रीट संरचनाएं स्थानीय तापमान को लगातार ऊपर ले जा रही हैं। हीट आईलैंड और हीट ट्रैप जैसी स्थितियां अब हीट स्ट्रोक के रूप में गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदलती दिख रही हैं। बड़े पैमाने पर शहरी वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाना अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य सुरक्षा का विषय बन चुका है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर