छप्पर उड़ चुके, फर्श गंदा, स्कूल की बदतर हालत, बिना सुरक्षा और सुविधाओं के पढ़ाई कर रहे हैं विद्यार्थी

जर्जर खपरैल स्कूल, जान जोखिम में
डाल पढ़ने को मजबर हरदी कला के छात्र
जर्जर भवन में
दम तोड़ती शिक्षा

बिलासपुर : शहर के 10 किमी दूर
स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला
हरदी कला स्कूल की स्थिति काफी
खराब है। बच्चों को खपरैल वाले
कच्चे और जर्जर भवन में बैठकर
पढ़ाई करना पड़ रहा है। स्कूल में न
साफ-सफाई की व्यवस्था है और न
ही शौचालय की सुविधा है। इसके
चलते बच्चों को भविष्य गढ़ने की राह
में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना
पड़ रहा है।
शौचालय की नहीं है सुविधा
स्कूल परिसर में शिक्षकों और बच्चों
के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है।
शिक्षकों और बच्चों को परेशानियों का
सामना करना पड़ता है। स्थिति यह
हो गई है कि बच्चों और शिक्षकों को
शौच के लिए आसपास में बने घरों में
जाना पड़ता है।

स्वयं सिद्धा फाऊंडेशन स्कूल की हालत सुधारने
हरदीकला मिडिल का जर्जर भवन जहां बैठकर बच्चे अध्ययन करने को मजबूर हैं।
286 बच्चों का स्कूल
बिल्हा ब्लाक के शासकीय पूर्व कक्षाएं कम और हालात
माध्यमिक शाला हरदी कला में 286
छात्र-छात्राओं को खपरीले वाले कच्चे
जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करना
पड़ रहा है। भवन के कई कक्षाओं की
हालत इतनी खराब है कि छप्पर ही
उड़ गए हैं। इसके बाद भी खतरों के
बीच क्लास की कमी की वजह से
बच्चों को जर्जर स्कूल में बैठना पड़
रहा है। कच्चे भवन की हालत इतनी
खराब है कि फर्श में गंदगी जमी हुई
है। साथ ही क्लास में अव्यवस्था का
आलम बना हुआ है। ऐसा नहीं है कि
स्कूल भवन की जर्जर की हालत की
जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं
हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल
की खराब स्थिति की जानकारी समय
समय पर प्रशासन को भी दी गई है।
इसके बाद भी बच्चों की बेहतर पढाई
के लिए भवन निर्माण को लेकर ध्यान
नहीं दिया जा रहा है।
चिंताजनक
हरदीकला के मिडिल स्कूल में
कुल 286 बच्चे दर्ज हैं। कक्षा छठवीं
में 86 बच्चे, सातवीं में 92 बच्चे और
कक्षा आठवीं में 106 बच्चे पढ़ाई
कर रहे हैं। इनमें से कक्षा सातवीं
के 72 छात्राओं को भवन की कमी
की वजह से दो पाली में बैठकर
खपरीले वाले जर्जर भवन में पढ़ाई
करना पड़ता है। इसके साथ ही
इसी भवन में रसोइयां भी संचालित
किया जा रहा है। वहीं, कक्षा छठवीं
और आठवीं के 194 छात्राओं को
पक्के भवन में बैठाया जाता है,
लेकिन वहां की कक्षाओं की भी
हालत काफी खराब बनी हुई है।
कक्षाओं से खिड़की गायब है और
फर्श काफी खराब स्थिति में है।
स्कूल में खपरें न होने के बाद भवन के दूसरे हिस्से में कक्षाएं लग रही हैं।
1966 में बना भवन आज जर्जर, बच्चों की जान खतरे में
हरदीकला के मिडिल स्कूल करीब 60
वर्ष पुराना हैं। इसका निर्माण 1966 में
कराया गया था। शुरुआत में इसकी
स्थिति बेहतर थी। लेकिन करीब 20 वर्षों
से इसका मेंटेनेंस नहीं कराया गया है।
इसके चलते यह भवन जर्जर स्थिति में
तत्काल जरूरत
स्कूल की बदतर स्थिति को लेकर
स्वयं सिद्धा फाउंडेशन के
सदस्यों ने बेहतर करने की मांग
प्रशासन से की है। स्कूल की जर्जर
स्थिति की जानकारी होने पर टीम
की महिलाओं ने स्कूल का निरीक्षण
किया और जल्द से जल्द भवन
निर्माण की मांग की। फाउंडेशन के
अध्यक्ष चंचल सलूजा ने कहा कि
शिक्षा हासिल करने के लिए काफी
कठिनाइयों का सामना करना पड़
रहा है। स्कूल में शौचालय की भी
सुविधा नहीं होना बच्चों के साथ
अन्याय है।
भवन की खराब स्थिति के
बारे में उच्च अधिकारियों को
जानकारी दी गई है। भवन की कमी
की वजह से परेशानी बनी हुई है।
भवन के निर्माण के लिए हमें फंड का
इंतजार है।
- ज्ञानेंद्र राय, एचएम
हरदीकला के मिडिल स्कूल
हरदीकला के मिडिल स्कूल की
खराब स्थिति होने की जानकारी
पहुंच गई है। इसके बाद भी कच्चे भवन
में बच्चों को बैठाकर उनकी जान को
खतरे में डाला जा रहा है। वहीं, नए
स्कूल भवन के निर्माण के लिए
अधिकारियों द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा
रहा है।
आपके माध्यम से मिल रही है। वहां
जल्द ही एक टीम भेजकर स्कूल की
स्थिति का परीक्षण कराकर डीओ
कार्यालय को जानकारी देंगे। फिर
फंड आते ही भवन का निर्माण और
मरम्मत कराएंगे।
भूपेंद्र कौशिक
ब्लाक शिक्षा अधिकारी, बिल्हा