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राष्ट्रीय आम दिवस पर वैज्ञानिकों ने दिया संदेश: आम केवल फल नहीं, पोषण, समृद्धि और कृषि विविधीकरण का आधार

क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर (छ.ग.) में गरिमामय आयोजन संपन्न

बिलासपुर। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में 22 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय आम दिवस उत्साह, गरिमा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर थे, जबकि डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ. संजय वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक एवं आयोजक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने कहा कि राष्ट्रीय आम दिवस केवल एक फल का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय कृषि, जैव विविधता, पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आर्थिक समृद्धि का उत्सव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आम की खेती की अपार संभावनाएं हैं। यदि गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक बागवानी, जल संरक्षण, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा आधुनिक फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाया जाए तो आम उत्पादक किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जलवायु-अनुकूल बागवानी तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने कहा कि आम भारतीय संस्कृति, परंपरा और कृषि अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों को उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन तथा मूल्य संवर्धन की तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे ताजा फलों की बिक्री के साथ-साथ आम से बनने वाले प्रसंस्कृत उत्पादों—जैम, जेली, पल्प, अचार एवं पेय पदार्थों—के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें।

डॉ. दिनेश पांडे, वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि विविधीकरण के वर्तमान दौर में फल आधारित कृषि प्रणालियां किसानों की आय को स्थिर एवं टिकाऊ बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। उन्होंने बताया कि आम के बागानों में अंतरवर्तीय फसलों, दलहनी एवं तिलहनी फसलों तथा कृषि वानिकी मॉडल को अपनाकर भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है। इससे किसानों को वर्षभर आय के विविध स्रोत प्राप्त होते हैं तथा प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर संरक्षण भी संभव होता है।

डॉ. (श्रीमती) निवेदिता पाठक, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने आम के पोषण महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आम विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, विटामिन ‘ई’, फोलेट, पोटैशियम, आहार रेशा तथा अनेक जैव सक्रिय एंटीऑक्सीडेंट का उत्कृष्ट स्रोत है। उन्होंने कहा कि नियमित एवं संतुलित मात्रा में आम का सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, आंखों के स्वास्थ्य, त्वचा की गुणवत्ता, पाचन तंत्र तथा हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। उन्होंने आम को “प्राकृतिक पोषण का खजाना” बताते हुए इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण भाग बनाने की सलाह दी।

श्रीमती वंदना एक्का, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी ने उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि शासन किसानों को फलोद्यान स्थापना, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, सूक्ष्म सिंचाई, जैविक खेती, पौध संरक्षण तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर वैज्ञानिक फलोत्पादन अपनाने का आग्रह किया।

एम.एससी. अंतिम वर्ष (सस्य विज्ञान) के छात्र अभिनव सैनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को आधुनिक कृषि विज्ञान, डिजिटल तकनीकों एवं नवाचारों के माध्यम से फलोत्पादन को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि आम भारतीय कृषि, संस्कृति एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों एवं किसानों के बीच वैज्ञानिक तकनीकों का प्रभावी समन्वय समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवा वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में ऐसी तकनीकों का विकास करें जो उत्पादन, गुणवत्ता एवं किसानों की आय—तीनों को सुदृढ़ कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुसंधान, विस्तार एवं किसानों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ फलोत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स ने किया। कार्यक्रम के अंत में वैज्ञानिक पुष्पालता तिर्की ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर के समस्त प्राध्यापक, वैज्ञानिकगण, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। राष्ट्रीय आम दिवस का यह आयोजन वैज्ञानिक जागरूकता, पोषण सुरक्षा, उद्यानिकी विकास तथा किसानों की आय वृद्धि के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुआ।

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