कानून के साथ संघर्ष में फंसे बच्चों की चिंताओं का समाधान विषय पर कार्यशाला

बिलासपुर। कानून के साथ संघर्ष में आए बच्चों की चिंता के समाधान और उनके पुनर्वास को लेकर बिलासपुर में तीसरी जिला स्तरीय अभिसरण बैठक आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी,यूनिसेफ और “चेतना” कार्यक्रम के सहयोग से हुई बैठक में पुलिस, न्यायपालिका और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बिलासागुड़ी में आयोजित बैठक में “कानून के साथ संघर्ष में फंसे बच्चों की चिंताओं का समाधान” विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। “चेतना” कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय अभिसरण बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि अपराध में शामिल बच्चों के सुधार और पुनर्वास की जिम्मेदारी केवल किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि पुलिस, न्यायपालिका, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, समाज कल्याण और परिवार सहित सभी संबंधित संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है। बैठक में ऐसे बच्चों को परामर्श, शिक्षा, कौशल विकास और सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को अपराधी नहीं, बल्कि परिस्थितियों का शिकार मानते हुए उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। समय पर सही मार्गदर्शन और सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से ऐसे बच्चों को नई दिशा देकर समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से बिलासपुर में लगातार “चेतना” कार्यक्रम के तहत जागरूकता और पुनर्वास की पहल की जा रही है।