गरीब आदिवासी महिला की मृत्यु के बाद शव बंधक बनाया, न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पहुँचा कलेक्टर और एसएसपी कार्यालय

हरिओम हॉस्पिटल प्रबंधन एवं डॉ. अभिषेक कश्यप के विरुद्ध एफ.आई.आर., मजिस्ट्रियल जांच और कठोर कार्रवाई की मांग
बिलासपुर, 30 जुलाई 2026। बिलासपुर के हरिओम हॉस्पिटल में भर्ती आदिवासी (गोंड) महिला स्व. तिलबसिया की मृत्यु के बाद उनके शव को कथित रूप से बंधक बनाकर रखने के गंभीर मामले को लेकर आज कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह घटना गरीब आदिवासी परिवार की असहायता और स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का अत्यंत पीड़ादायक उदाहरण है।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्राम नेउर, थाना कोराडोल, जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर निवासी स्व. तिलबसिया पेड़ काटने के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। परिजनों ने उन्हें 25 जुलाई 2026 को बिलासपुर स्थित हरिओम हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। उपचार के दौरान 28 जुलाई 2026 को उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों द्वारा ₹21,780 जमा किए जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने कथित रूप से ₹84,700 की अतिरिक्त मांग करते हुए शव देने से इंकार कर दिया।

मृतका के पति जगन्नाथ अत्यंत गरीब आदिवासी परिवार से हैं। वे राशि की व्यवस्था करने गांव लौटे और पुनः अस्पताल पहुंचकर आंशिक राशि की जानकारी दी, किंतु अस्पताल प्रबंधन ने पूर्ण राशि जमा किए बिना शव सौंपने से मना कर दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मृत्यु के लगभग दो दिन बाद तक शव अस्पताल में रोके रखा गया, जिससे परिवार गहरे मानसिक आघात में है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह गंभीर तथ्य भी रखा कि हरिओम हॉस्पिटल में शव रखने के लिए मर्चूरी (शवगृह) की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शव को जिला अस्पताल अथवा सिम्स मेडिकल कॉलेज नहीं भेजा और लगभग दो दिनों तक अपने अस्पताल परिसर में ही रखा। प्रतिनिधिमंडल ने इसे मानवीय गरिमा, स्वास्थ्य मानकों और प्रशासनिक दायित्वों के विपरीत अत्यंत गंभीर मामला बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मृतका का आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, इसके बावजूद धन की मांग कर शव रोकना गंभीर अनियमितता और दंडनीय कृत्य प्रतीत होता है। इस संबंध में आयुष्मान योजना के प्रावधानों की जांच की मांग भी की गई है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मृतका का शव तत्काल सम्मानपूर्वक परिजनों को सौंपा जाए, हरिओम हॉस्पिटल प्रबंधन एवं डॉ. अभिषेक कश्यप के विरुद्ध शव बंधक बनाकर रखने, अवैध धन मांगने और अमानवीय व्यवहार के मामले में एफ.आई.आर. दर्ज की जाए तथा पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच कर दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीड़ित आदिवासी परिवार को आर्थिक सहायता और न्याय प्रदान करने की मांग भी की गई।
विजय केशरवानी का बयान
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा, “यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारी संवेदनाओं और व्यवस्था की परीक्षा है। एक गरीब आदिवासी महिला की मृत्यु के बाद उसके शव को पैसे के अभाव में अस्पताल में रोककर रखना मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। इससे भी अधिक पीड़ादायक तथ्य यह है कि जिस अस्पताल में मर्चूरी तक नहीं है, वहाँ शव को दो दिनों तक रखा गया और उसे जिला अस्पताल या सिम्स मेडिकल कॉलेज नहीं भेजा गया। यह मृतका की गरिमा और उसके परिवार की भावनाओं के साथ गंभीर अन्याय है।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है की मृतक आदिवासी महिला प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की रेहने वाली है , एक आदिवासी परिवार को अपनी पत्नी का अंतिम दर्शन करने के लिए भी आर्थिक शर्तों का सामना करना पड़ रहा है। यदि गरीब और आदिवासी परिवारों के साथ ऐसा व्यवहार होगा तो आम जनता स्वास्थ्य व्यवस्था पर कैसे विश्वास करेगी? दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी गरीब परिवार के साथ ऐसी अमानवीय घटना दोबारा न हो।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि शीघ्र न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस पीड़ित परिवार के सम्मान और न्याय के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होगी।
आज कलेक्टर एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिले प्रतिनिधिमंडल में लक्ष्मी साहू, संतोष गर्ग, जीतू यादव, दीपक कौशिक, महेश सिंह ठाकुर, अमित दुबे, अंकित प्रजापति, शादाब खान, राजू सूर्यवंशी, भरत जोशी, मकसूद अली, लक्की मिश्रा, जय बहादुर तथा पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी शामिल थे।