50 लाख विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर, अब कुर्सी नहीं बचेगी,शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग को लेकर गोलबाजार में होगा पुतला दहन : NSUI

50 लाख छात्रों का भविष्य किसी मंत्री की कुर्सी से छोटा नहीं हो सकता। NSUI ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का इस्तीफे का मांगा
मंत्री किसी भी गड़बड़ी के लिए मंत्री जिम्मेदार नहीं होता, तो फिर शिक्षा विभाग की जवाबदेही किसकी है ? रिल बनने के लिए मंत्री बने है।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लगभग 50 लाख विद्यार्थियों के भविष्य से लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। एनएसयूआई प्रदेश महासचिव अर्पित केशरवानी के नेतृत्व द्वारा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग को लेकर आज गोलबाजार में उनका पुतला दहन किया गया।

एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सरकार की शिक्षा नीतियों और राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं का खामियाजा सीधे छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। इसके साथ ही कोरोना काल में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई “महतारी दुलार योजना” का लाभ अब पात्र छात्र-छात्राओं को नहीं मिल रहा है, जिससे अनेक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। एनएसयूआई इस योजना का लाभ पुनः शुरू करने और पात्र विद्यार्थियों को तत्काल लाभ दिलाने की मांग करती है।
एनएसयूआई ने कहा कि छात्रों से जुड़े लगातार बढ़ते मुद्दों, शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था तथा महतारी दुलार योजना के लाभ से विद्यार्थियों को वंचित किए जाने के विरोध में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं हिंदी परीक्षा पेपर लीक मामले में शिक्षा व्यवस्था की साख पर लगे गंभीर दाग और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की नैतिक जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) बिलासपुर द्वारा गोलबाजार में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का पुतला दहन एवं जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
पूर्व प्रदेश सचिव सोहराब ख़ान ने कहा कि जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सार्वजनिक रूप से यह कह सकते हैं कि उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए था, तब छत्तीसगढ़ में पेपर लीक जैसी गंभीर घटना के बाद अपने पद की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने से आखिर क्यों बच रहे हैं?
उन्होंने कहा कि 50 लाख छात्रों का भविष्य किसी मंत्री की कुर्सी से छोटा नहीं हो सकता। पेपर लीक के कारण लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का विश्वास शिक्षा व्यवस्था से डगमगाया है। ऐसे समय में शिक्षा मंत्री का पहला दायित्व जवाबदेही तय करना होना चाहिए, न कि केंद्र के मंत्रियों के इस्तीफे पर टिप्पणी करना।
एनएसयूआई नेताओं ने कहा कि यदि मंत्री यह मानते हैं कि किसी भी गड़बड़ी के लिए मंत्री जिम्मेदार नहीं होता, तो फिर शिक्षा विभाग की सर्वोच्च जवाबदेही किसकी है? लोकतंत्र में नैतिक जिम्मेदारी से भागकर शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि आज छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सरकार शिक्षा व्यवस्था में पैदा हुए भरोसे के संकट पर मौन है। विद्यार्थी जवाब चाहते हैं, बहाने नहीं।
एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
यदि सरकार इस मांग को अनसुना करती है, तो यह आंदोलन बिलासपुर से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध रूप से तेज किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।एनएसयूआई ने बिलासपुर के सभी छात्र-छात्राओं, युवाओं एवं जागरूक नागरिकों से आह्वान किया है कि 50 लाख विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही के लिए गोलबाजार में आयोजित इस जन आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सरकार को सख्त संदेश दें कि छात्रों के भविष्य से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।इस दौरान प्रदेश सचिव रंजेश सिंह, आकाश श्रीवास्तव,रिहान रात्रे, शाहिल अली,देवराज अहिरवार,अमन यादव, कासिम अली,किशन सोनी,संस्कार रजक,आयुष भट्ट,मुकेश कुमार कुरी,सिनू रात्रे,अतुल,कोमल साहू,साहिल अली,काशिम अली,वीर यादव,रोहन सारथी,युवराज सूर्यवंशी,कार्तिक नवरंग,अक्षत वैष्णव,रवि सूर्यवंशी,दीनू ध्रुव,आयुष रात्रे,उत्तम दहेडिया,शुभम खुर्रे