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राष्ट्रीय खेल दिवस पर कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर में संगोष्ठी एवं खेल गतिविधियों का आयोजन

‘पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी’—विद्यार्थियों ने रस्सा खींच और कुर्सी दौड़ में दिखाया उत्साह; विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया संदेश

बिलासपुर, । राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर में खेलों के महत्व और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से विशेष संगोष्ठी एवं विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने खेलों को केवल मनोरंजन का साधन न मानते हुए उन्हें स्वस्थ शरीर, सकारात्मक सोच, अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को खेलों एवं नियमित शारीरिक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना तथा उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, टीम भावना, सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व के गुण विकसित करना रहा। संगोष्ठी के साथ आयोजित मनोरंजक खेल प्रतियोगिताओं ने पूरे कार्यक्रम को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया।

मेजर ध्यानचंद के योगदान को किया याद

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी-मुंगेली रहे। इस अवसर पर डॉ. एस.के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर; डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर; डॉ. दिनेश पांडेय, वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) एवं क्रीड़ा प्रभारी; डॉ. वाई.पी.एस. निराला, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान); अतिथि वैज्ञानिक डॉ. कृष्णा तथा डॉ. प्रज्ञा तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। छात्र देवराज ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया तथा क्रमवार वक्ताओं को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया।

खेल केवल मनोरंजन नहीं, व्यक्तित्व निर्माण का माध्यम

संगोष्ठी में प्रथम वक्ता डॉ. दिनेश पांडेय ने विद्यार्थियों के जीवन में खेलों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं। नियमित खेल एवं शारीरिक गतिविधियां शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में सफलता और असफलता दोनों से सीखने का अवसर मिलता है। जीतने की खुशी जहां आत्मविश्वास बढ़ाती है, वहीं हार व्यक्ति को अपनी कमियों को पहचानकर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।

मेजर ध्यानचंद की खेल भावना से प्रेरणा लेने का आह्वान

डॉ. गीत शर्मा ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेल दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि देश के महान खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों से प्रेरणा लेने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों में टीम भावना, अनुशासन, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सामाजिक समन्वय विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को शतरंज, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों और मनोरंजक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि “खूब पढ़ें, खूब खेलें और स्वस्थ रहें।” उन्होंने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी विद्यार्थी जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

मोबाइल की बढ़ती निर्भरता पर जताई चिंता

डॉ. एस.के. वर्मा ने वर्तमान समय में मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण विद्यार्थियों का एक बड़ा हिस्सा शारीरिक गतिविधियों और पारंपरिक खेलों से दूर होता जा रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से बचने और अपने दैनिक जीवन में खेल तथा शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय निर्धारित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेलों से मिलने वाला अनुभव केवल मैदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि टीम में काम करने, चुनौतियों का सामना करने, समय प्रबंधन करने और नेतृत्व करने जैसे गुणों के विकास में भी उपयोगी होता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग ज्ञान एवं शिक्षा के लिए करें, लेकिन उसके साथ वास्तविक जीवन की गतिविधियों और खेलों के लिए भी पर्याप्त समय निकालें।

खेलों से विकसित होती है नेतृत्व क्षमता

मुख्य अतिथि डॉ. एस.एल. स्वामी ने विद्यार्थियों को विभिन्न खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खेल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता और टीम भावना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी रुचि के अनुसार किसी न किसी खेल को नियमित रूप से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

विद्यार्थी गर्वित जैन ने भी रखे विचार

इस अवसर पर विद्यार्थी गर्वित जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों को अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से खेल गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

रस्सी खींच ने बढ़ाया उत्साह, कुर्सी दौड़ में दिखी खेल भावना

संगोष्ठी के साथ विद्यार्थियों के लिए विभिन्न मनोरंजक एवं खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें रस्सा खींच प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विद्यार्थियों ने विभिन्न टीमों में विभाजित होकर पूरे जोश, उत्साह और ऊर्जा के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने वातावरण को जीवंत बना दिया।

इसके अलावा कुर्सी दौड़ जैसी मनोरंजक प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग, अनुशासन और खेल भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

पढ़ाई और खेल एक-दूसरे के पूरक

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षा और खेल को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना जाना चाहिए। नियमित शारीरिक गतिविधियां विद्यार्थियों को तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और सक्रिय जीवनशैली अपनाने में मदद करती हैं। वहीं खेल के मैदान से प्राप्त अनुशासन, टीमवर्क और संघर्ष करने की क्षमता भविष्य के व्यावसायिक एवं सामाजिक जीवन में भी उपयोगी साबित होती है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह संदेश स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी यदि खेल और शिक्षा के बीच संतुलन स्थापित करे तो उसके व्यक्तित्व का अधिक व्यापक और संतुलित विकास संभव है।

स्वस्थ युवा, सशक्त समाज का संदेश

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए केवल मनोरंजन और प्रतियोगिता का अवसर नहीं रहा, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच की दिशा में प्रेरणादायी पहल भी बना। संगोष्ठी के विचारों और खेल गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है और स्वस्थ मन ही बेहतर शिक्षा, बेहतर निर्णय तथा बेहतर भविष्य की आधारशिला बनता है।

कार्यक्रम का सफल संचालन छात्र देवराज द्वारा किया गया। अंत में सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में हुआ।

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