निर्यात बंद, संकट में चरौटा और बबूल
संग्रहण से हाथ खींच रहे संग्राहक

बिलासपुर- निर्यात बंद का तीसरा साल। भाव लगातार उतार की राह पर। फलत: चरोटा संग्राहक अब संग्रहण से हाथ खींच रहे हैं। इसी तरह बबूल बीज भी 2200 से 2300 रुपए क्विंटल पर रहकर और नीचे जाने का संकेत दे रहा है।
महुआ, चरोटा, बबूल बीज और साल के बीज के लिए छत्तीसगढ़ की पहचान देश के वनोपज बाजार में अलग ही है लेकिन गिरते दाम और उपभोक्ता राज्यों की घटती खरीदी के बाद अब संग्राहक ऐसे वनोपज की तलाश में हैं, जो पूरे साल मांग में रहते हैं। दूसरी तरफ वनोपज बाजार को आस है कि अच्छे दिन जरूर आएंगे।

संग्रहण से हाथ खींच रहे संग्राहक
जापान, ताइवान और मलेशिया। यह तीन देश छत्तीसगढ़ से चरोटा की खरीदी करते हैं लेकिन तीसरा साल है इन देशों के लिए निर्यात बंद का। घरेलू मांग नहीं के बराबर है। इसलिए चरोटा 2200 से 2300 रुपए क्विंटल पर स्थिर है। इसमें संकेत और नीचे जाने के मिल रहे हैं। इसलिए चरोटा संग्राहक अब संग्रहण से दूरी बना रहे हैं। इधर वनोपज बाजार लगातार विदेश व्यापार विभाग से निर्यात की अनुमति के लिए संपर्क बनाए हुए है।

महुआ में सिर्फ दो खरीददार
सख्त है सरकार नशे के सामान की खरीदी बिक्री को लेकर। ऐसे में संग्राहक और वनोपज बाजार शांत है। घरेलू शराब उत्पादन इकाइयां वैसे भी संचालन को लेकर सतर्क हैं । इसलिए अब केवल झारखंड और बिहार जैसे राज्यों की खरीदी महुआ में बनी हुई है लेकिन सीमित खरीददार होने की वजह से प्रतिस्पर्धा जैसी स्थिति नहीं है। इसलिए महुआ में 5300 से 5400 रुपए क्विंटल की दर पर सौदे हो रहे हैं।
ढलान की ओर बबूल बीज
हरा चारा खूब। वैकल्पिक पशु आहार की उपलब्धता भी भरपूर। इसलिए पशु आहार उत्पादन करने वाली इकाइयां सीमित मात्रा में ही बबूल बीज की खरीदी कर रहीं हैं। एकमात्र उपभोक्ता राज्य बिहार से भी मांग कमजोर होती जा रही है। ऐसे में बबूल बीज के भाव में 200 से 300 रुपए की गिरावट के बाद नई कीमत 2300 से 2400 रुपए क्विंटल बोली जा रही है। संकेत और भी नीचे जाने की मिल रहे हैं।
वर्जन
उत्साहजनक मांग नहीं
महुआ और चरोटा में उत्साहजनक खरीदी नहीं है। संग्राहकों की रुचि संग्रहण को लेकर कम हो रही है। ऐसी ही स्थिति बबूल बीज में भी बनी हुई है।
-सुभाष अग्रवाल, एसपी इंडस्ट्रीज, रायपुर