सिलपहरी के उद्योगों को खूंटाघाट-अहिरन से मिलेगा पानी
निगम से कनेक्शन की मंजूरी
भूजल स्तर कम होने से बढ़ी परेशानी
सीएसआईडीसी उठाएगा पाइपलाइन और कनेक्शन का खर्च
बिलासपुर। सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में पानी की समस्या दूर करने के लिए अब खूंटाघाट बांध और अहिरन नदी के सरफेस वाटर का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए सीएसआईडीसी ने नगर निगम की पाइपलाइन से कनेक्शन देने की मांग की थी, जिसे कलेक्टर-कमिश्नर की टीएल बैठक में मंजूरी मिल गई है। सीएसआईडीसी ने कनेक्शन और पाइपलाइन से संबंधित अपना इस्टीमेट भी निगम को भेज दिया है।
सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में भूजल का रिसोर्स सीमित है। कई स्थानों पर बोर कराने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया है। अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र के भूजल में कैल्शियम सिलिकेट की मात्रा होने के कारण पानी को ऊपर खींचने में भी परेशानी आती है। ऐसे में उद्योगों के लिए स्थायी और वैकल्पिक जलस्रोत की जरूरत महसूस की जा रही थी। सरफेस वाटर मिलने से उद्योगों की बोर पर निर्भरता कम होगी और पानी की उपलब्धता के लिए एक अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकेगा।
निगम की पाइपलाइन से मिलेगा कनेक्शन
नगर निगम खूंटाघाट बांध और अहिरन नदी से सरफेस वाटर लेकर पाइपलाइन के जरिए आगे पहुंचा रहा है। इसी पाइपलाइन से सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र को पानी देने का प्रस्ताव सीएसआईडीसी ने रखा था। इसके लिए पाइपलाइन में आधा इंच का कनेक्शन देने की मांग की गई है। मंजूरी मिलने के बाद अब कनेक्शन देने की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
मौजूदा पाइपलाइन करीब 3 किमी दूर
वर्तमान में निगम की पानी की पाइपलाइन महामंद जाने वाले रास्ते से होकर गुजरती है। यह सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र से करीब 3 किलोमीटर दूर है। औद्योगिक क्षेत्र तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन का खर्च सीएसआईडीसी उठाएगा। पानी पहुंचाने के लिए इंटकवेल बनाने की भी योजना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
17 लघु उद्योगों को होगा फायदा
सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में वर्तमान में करीब 17 लघु उद्योग संचालित हैं। इसके अलावा कुछ बड़ी इकाइयां पहले से मौजूद हैं और नई छोटी औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित हो रही हैं। ऐसे में उद्योगों के विस्तार के लिए पानी की उपलब्धता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरफेस वाटर मिलने से भूजल पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भी पानी का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध रहेगा।