आदिवासी किसानों को उन्नत कुल्थी बीजों का वितरण, वैज्ञानिकों ने दी उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी

केवीके कटघोरा, कोरबा में बीज वितरण सह कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
कोरबा,।कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कटघोरा, जिला कोरबा में आज दिनांक 18 सितंबर 2026 को आदिवासी कृषकों के लिए बीज वितरण सह कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी किसानों को उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण कुल्थी बीज उपलब्ध कराने के साथ-साथ इसकी वैज्ञानिक खेती, उन्नत कृषि पद्धतियों तथा किस्म-विशिष्ट उत्पादन तकनीकों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम के अंतर्गत केवीके, कटघोरा, कोरबा द्वारा चयनित 12 आदिवासी किसानों को कुल्थी की उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए। किसानों को इंदिरा कुल्थी-3 के 50 किलोग्राम तथा छत्तीसगढ़ कुल्थी-2 के 50 किलोग्राम बीज, अर्थात कुल 100 किलोग्राम प्रमाणित/उन्नत बीज उपलब्ध कराया गया। इन बीजों का वितरण किसानों को अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति से कुल्थी की खेती करने तथा बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा किसानों को कुल्थी की उन्नत कृषि एवं सस्य प्रबंधन तकनीकों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गई। किसानों को खेत की तैयारी, उपयुक्त बुवाई समय, बीज दर, बीजोपचार, कतार दूरी, पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा फसल की देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। साथ ही, इंदिरा कुल्थी-3 एवं छत्तीसगढ़ कुल्थी-2 की प्रमुख विशेषताओं, उनकी उपयुक्तता तथा किस्म-विशिष्ट कृषि तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कुल्थी एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल होने के साथ-साथ कम पानी एवं अपेक्षाकृत कम इनपुट में उत्पादन देने वाली फसल है। वर्षा आधारित एवं सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी खेती किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है। कुल्थी को फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा कृषि प्रणाली में दलहनी फसलों के समावेशन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वैज्ञानिकों ने किसानों को उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डॉ. एस.के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर ने किसानों को संबोधित करते हुए उन्नत बीजों के महत्व तथा वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी को खेतों में व्यवहारिक रूप से लागू करने तथा फसल उत्पादन के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विज्ञान केंद्र से निरंतर संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया।
डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने कृषकों के साथ कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका एवं किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों के हस्तांतरण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, उचित सस्य प्रबंधन एवं समयबद्ध तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों की उत्पादकता एवं आय में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ती हैं।
कार्यक्रम में डॉ. अर्चना केरकट्टा, एसोसिएट प्रोफेसर (कीट विज्ञान) द्वारा फसल में कीट प्रबंधन एवं आवश्यक सावधानियों के संबंध में उपयोगी जानकारी प्रदान की गई। डॉ. दिनेश पांडे, वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) ने कुल्थी की वैज्ञानिक खेती, पोषक तत्व प्रबंधन एवं फसल उत्पादन तकनीकों के विभिन्न पहलुओं पर किसानों को मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों से कुल्थी की खेती से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान एवं तकनीकी सुझावों के माध्यम से उत्तर दिया गया। प्रशिक्षण से किसानों को उन्नत बीजों के उपयोग के साथ-साथ फसल उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एआईसीआरपी ऑन एरिड लेग्यूम्स के प्रमुख अन्वेषक डॉ. अवनीत कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा चयनित आदिवासी कृषकों के प्रति आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त की।
यह कार्यक्रम आदिवासी किसानों तक उन्नत कृषि तकनीकों एवं गुणवत्तापूर्ण बीजों की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों में कुल्थी की वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर दलहनी फसलों के उत्पादन, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।