वोट चोरी के खुलासों के संबंध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग 28 को
जिला कांग्रेस के द्वारा 28 सितंबर को किया जायेगा कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च
बिलासपुर।भारतीय निर्वाचन आयोग के भीतर अभूतपूर्व दबाव को उजागर करने वाला एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है।सामने आई जानकारी के अनुसार पिछले 10 महीना के दौरान दो निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए एक तरफा निर्णय पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।इन आपत्तियों पर बार-बार यह मुद्दा उठाया गया है की सीईसी द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, जिसमें अनाधिकृत रूप से नए मतदाताओं को जोड़ना, नाम को हटाना तथा निर्वाचन आयोग की आईटी प्रणाली को दिल्ली में केंद्रीकृत करना शामिल है, के संबंध में दोनों निर्वाचन आयुक्त को अंधेरे में रखा जा रहा है।
यह खुलासा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रुख को स्पष्ट रूप से सही साबित करता है, जिन्होंने पहले ही इस बड़े पैमाने में चलाए जा रहे वोट चोरी अभियान के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई थी। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार देश को आगाह करते रही है की चुनावी तंत्र का इस्तेमाल सत्तारूढ़ बीजेपी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। अब रिकॉर्ड पर यह सामने आया है कि निर्वाचन आयोग को एक व्यक्ति के नियंत्रण वाली व्यवस्था के रूप में चलाया गया, जिसमें राज्य के अधिकारियों को दरकिनार करते हुए व्यापक चुनावी अनियमिताओं को अंजाम दिया गया।
कांग्रेस पार्टी द्वारा लिए गए निर्णय अनुसार इस तानाशाही पूर्ण कार्यप्रणाली एवं संस्थागत कब्जे के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए विरोध प्रदर्शन के दूसरे चरण के तहत 28 सितंबर को सुबह 11:30 बजे बिलासपुर शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कांग्रेस भवन से कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च आयोजित किया जा रहा है, विरोध मार्च के समापन के पश्चात कांग्रेसजन द्वारा ज्ञापन सौप के ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी, पद से तुरंत हटाने तथा उनके कार्यकाल में लिए गए सभी निर्णयो एवं मतदाता सूची में किए गए बदलावों की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी की जाएगी।