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49 दिवसीय साइबर जागृति महाअभियान का समापन,18 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा सुरक्षा का संदेश

बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस का 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चला 49 दिवसीय साइबर जागृति महाअभियान शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। अभियान के दौरान विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, श्रमिकों, ग्रामीणों और शासकीय कर्मचारियों समेत समाज के विभिन्न वर्गों को साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए। पुलिस के अनुसार विभिन्न गतिविधियों के जरिए 18 लाख से अधिक नागरिकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
अभियान को सात सप्ताह में बांटकर अलग-अलग वर्गों पर केंद्रित किया गया। पहले सप्ताह विद्यार्थियों और युवाओं, दूसरे सप्ताह बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थाओं, तीसरे सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों, चौथे सप्ताह महिलाओं एवं छात्राओं, पांचवें सप्ताह असंगठित क्षेत्र के युवाओं एवं श्रमिकों, छठे सप्ताह शासकीय संस्थाओं तथा सातवें सप्ताह ग्रामीण और अर्धसैनिक क्षेत्र के नागरिकों को जागरूक किया गया।

जुम्बा से लेकर नुक्कड़ नाटक तक कई गतिविधियां

पुलिस ने साइबर जागरूकता के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ कई नए प्रयोग किए। साइबर संवाद, साइबर जुम्बा, साइबर जागृति रक्षा सूत्र, नुक्कड़ नाटक, साइबर प्रश्नोत्तरी, नाटक एवं नृत्य, खेल उत्सव, स्केटिंग, ताइक्वांडो और कराटे जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया।
एफएम नेटवर्क के माध्यम से साइबर जागृति रेडियो प्रसारण किया गया। साइबर सुरक्षा पर आधारित विशेष गीत भी विभिन्न स्थानों पर प्रस्तुत किए गए। पुलिस ग्राउंड में साइबर फ्रॉड मटका फोड़ कार्यक्रम के साथ करीब 1,000 आकाशदीप जलाकर भी जागरूकता संदेश दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर ग्राम चौपाल लगाकर ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से बचने के तरीके बताए गए। गणेश पंडालों और सुबह की गतिविधियों के दौरान भी साइबर सुरक्षित सुप्रभात अभियान चलाया गया।

डिजिटल अरेस्ट से बचने पर विशेष जोर

अभियान के दौरान डिजिटल अरेस्ट के मामलों को लेकर विशेष रूप से जागरूक किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने एक परिवार के साथ हुई घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि साइबर ठगों ने करीब 17 दिनों तक परिवार को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भयभीत और नियंत्रित रखा तथा लाखों रुपये की जमा पूंजी ठगी का शिकार हुई।नागरिकों को बताया गया कि कोई पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या सरकारी संस्था वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही किसी खाते में पैसे जमा कराने के लिए कहती है।

इन साइबर अपराधों से बचाव की दी जानकारी

अभियान में ऑनलाइन ठगी, यूपीआई और क्यूआर कोड फ्रॉड, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, ओटीपी और केवायसी फ्रॉड, बैंक एवं कार्ड फ्रॉड, एटीम फ्रॉड, सिम स्वैप, पहचान की चोरी, अकाउंट हैकिंग, सोशल मीडिया एवं ई-मेल हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल, साइबर स्टॉकिंग, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो और डीपफेक जैसे अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए।

9 साल के स्वास्तिक की जागरूकता ने किया प्रभावित

अभियान के दौरान डेली रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान डीपीएस स्कूल के 9 वर्षीय छात्र स्वास्तिक झा ने पुलिस को साइबर अपराधों और उनसे बचाव के तरीकों की जानकारी दी। उसकी जागरूकता से प्रभावित होकर एसएसपी रजनेश सिंह ने उसे प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।

समापन समारोह में प्रतिभागियों और सहयोगियों का सम्मान

समापन समारोह में अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों तथा सहयोगी संस्थाओं और व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान साइबर सुरक्षा पर आधारित नृत्य, नाट्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।
कार्यक्रम में एसएसपी रजनेश सिंह, कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, एएसपी सिटी पंकज पटेल, एएसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी सिविल लाइन परमेश्वर तिलकवार सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि, प्रतिभागी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।पुलिस ने नागरिकों से अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, यूपीआई पिन और पासवर्ड साझा नहीं करने, अनजान ऐप डाउनलोड नहीं करने तथा वीडियो कॉल पर पुलिस या जांच एजेंसी बनकर धमकाने वालों से सावधान रहने की अपील की। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करने और पुलिस को सूचना देने कहा गया।

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