Blog

अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में देरी से लड़खड़ा रही उच्च शिक्षा व्यवस्था

बिलासपुर संभाग के सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित, कई विषयों की कक्षाएं नहीं हो पा रहीं संचालित, 531 अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे चल रही शिक्षण व्यवस्था

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के शासकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है, लेकिन अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसका सीधा असर बिलासपुर संभाग के महाविद्यालयों में दिखाई देने लगा है। कई विषयों की नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं, जबकि अनेक महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को शैक्षणिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद महाविद्यालयों में पाठ्यक्रमों का दायरा बढ़ा है। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर नए विषयों और पाठ्यक्रमों को शामिल किया गया है। ऐसे में नियमित प्राध्यापकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए अतिथि व्याख्याताओं की भूमिका पहले की तुलना में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी ने उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, केवल बिलासपुर संभाग के सरकारी महाविद्यालयों में ही 531 अतिथि व्याख्याता कार्यरत हैं। यह संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संभाग की उच्च शिक्षा व्यवस्था किस हद तक अतिथि व्याख्याताओं पर निर्भर है। यदि समय पर नियुक्तियां नहीं होती हैं, तो इसका प्रभाव हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ना तय है।

कई विषयों की कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं

महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है और प्रवेश की अंतिम तिथि भी बढ़ाई जा चुकी है। आने वाले दिनों में विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि होगी। दूसरी ओर, अनेक महाविद्यालयों में नियमित प्राध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। ऐसे में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति नहीं होने से कई विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाएं जुलाई से प्रारंभ हो जानी चाहिए थीं। वहीं, प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर के आंतरिक मूल्यांकन सितंबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित हैं। ऐसी स्थिति में पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों के पास सीमित समय बचा है।

बिलासपुर संभाग के महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की स्थिति

जिला कार्यरत अतिथि व्याख्याताओं की संख्या

बिलासपुर 111
कोरबा 83
रायगढ़ 75
जांजगीर-चांपा 72
सक्ती 70
सारंगढ़-बिलाईगढ़ 47
मुंगेली 40
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही 33
कुल 531

सत्र 2025-26 के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार बिलासपुर जिले के सरकारी महाविद्यालयों में सबसे अधिक 111 अतिथि व्याख्याता कार्यरत हैं।

बिलासपुर जिले के महाविद्यालयों की स्थिति

बिलासपुर जिले में सबसे अधिक 23 अतिथि व्याख्याता शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कार्यरत हैं। इसके अलावा ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय में 12, जमुना प्रसाद वर्मा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 8 तथा शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय, बिल्हा में 7 अतिथि व्याख्याता कार्यरत हैं। कई महाविद्यालय ऐसे भी हैं, जहां अतिथि व्याख्याताओं की संख्या बहुत कम है, जबकि कुछ नए महाविद्यालयों में अभी भी शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ नहीं हो सकी है।

विशेषज्ञों की राय: नियुक्ति में देरी का खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित करती है। यदि समय पर नियुक्तियां नहीं होती हैं, तो पाठ्यक्रम पूरा करने, आंतरिक मूल्यांकन, प्रयोगात्मक कार्य और परीक्षा की तैयारी जैसी गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों की संरचना पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो गई है। ऐसे में विषय विशेषज्ञों की अनुपस्थिति विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर महंत ने की हस्तक्षेप की मांग

पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. चरणदास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति शीघ्र करने की मांग की है।

उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उच्च शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार अध्यापन कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन रिक्त नियमित पदों के विरुद्ध अब तक अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति नहीं हो सकी है। उन्होंने अतिथि व्याख्याता नीति के अनुसार शीघ्र नियुक्ति आदेश जारी करने का आग्रह किया है।

उच्च शिक्षा मंत्री से डॉ. रमन सिंह ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की कक्षाएं जुलाई से शुरू होनी थीं, लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं होने के कारण शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने अधिकारियों को नियमों के अनुरूप शीघ्र नियुक्ति आदेश जारी करने के निर्देश देने का आग्रह किया है।

12 अगस्त को रायपुर के तूता में धरना दे चुके हैं अतिथि व्याख्याता

अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। वहीं, विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। इस संबंध में 12 अगस्त को छत्तीसगढ़ के अतिथि व्याख्याता रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर ध्यानाकर्षण प्रदर्शन भी कर चुके हैं।

अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि शासन का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। यदि जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

विद्यार्थियों, अभिभावकों और अतिथि व्याख्याताओं का मानना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया में और देरी हुई, तो इसका प्रभाव केवल वर्तमान सत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी परीक्षाओं और शैक्षणिक परिणामों पर भी दिखाई देगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *