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आईसीएआर क्षेत्रीय केंद्र, कटराई के शैक्षणिक भ्रमण से छात्रों ने सीखी आधुनिक उद्यानिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी की बारीकियाँ

बिलासपुर, । बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के छात्रों ने हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध कुल्लू घाटी स्थित आईसीएआर क्षेत्रीय केंद्र, कटराई का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक कृषि अनुसंधान, उद्यानिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना था।

भ्रमण के दौरान जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. चंद्रिश चंदेल ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने संस्थान में संचालित विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों, विकसित की गई उन्नत किस्मों तथा किसानों के लिए उपयोगी तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. यशपाल निराला एवं डॉ. पुष्पालता तिर्की भी उपस्थित रहे। छात्र दल के बालक वर्ग के प्रभारी मोक्ष चंद्राकर तथा बालिका वर्ग की प्रभारी चारु पटेल ने विद्यार्थियों के समूह का नेतृत्व किया।

भ्रमण के दौरान छात्रों ने संस्थान के संग्रहालय, प्रयोगशालाओं, प्रदर्शन प्रक्षेत्रों, मधुमक्खी पालन केंद्र, संरक्षित पौधगृह (ग्रीन हाउस) तथा बीज प्रसंस्करण इकाई का अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने अनुसंधान कार्यों, नई किस्मों के विकास तथा किसानों तक तकनीकों के प्रसार की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

प्रदर्शन प्रक्षेत्रों में छात्रों ने फूलगोभी, पत्तागोभी, शिमला मिर्च एवं प्याज की विभिन्न उन्नत किस्मों का अध्ययन किया। उन्हें इन किस्मों की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधकता तथा विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन के बारे में जानकारी दी गई।

भ्रमण का प्रमुख आकर्षण संस्थान द्वारा विकसित विशेष किस्म पूसा पर्पल कली फ्लावर -1 रही। छात्रों ने इस बैंगनी रंग की फूलगोभी की विशेषताओं, पोषण गुणों तथा इसकी बढ़ती बाजार मांग के बारे में जाना। इसके अतिरिक्त पूसा हाइब्रिड – 301 तथा पूसा स्नोबॉल हाइब्रिड -1 सहित अन्य उन्नत किस्मों की विशेषताओं का भी अध्ययन किया।

मधुमक्खी पालन केंद्र में विद्यार्थियों को मधुमक्खियों के प्रबंधन, शहद उत्पादन तथा परागण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि मधुमक्खी पालन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

छात्रों ने विभिन्न समशीतोष्ण पुष्पीय एवं फल प्रजातियों का भी अवलोकन किया। उन्हें सेब, नाशपाती, आलूबुखारा तथा अन्य फलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों, पौध तैयार करने की विधियों और संरक्षण उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही बीज प्रसंस्करण इकाई में गुणवत्तायुक्त बीजों की सफाई, छंटाई, उपचार तथा भंडारण की प्रक्रियाओं को भी समझाया गया।

भ्रमण के उपरांत छात्रों ने बताया कि इस शैक्षणिक यात्रा से उन्हें कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर मिला। आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं, उन्नत किस्मों तथा नवीन कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।

महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल तथा व्यावसायिक दक्षता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे छात्रों को कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधानों और तकनीकी प्रगतियों की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त होती है, जो उनके भविष्य के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

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