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गर्मी में पानी की किल्लत से राहत देगा ग्रे-वॉटर प्लांट,46 गांवों में नदियों व तालाबों पर बनेंगे सिस्टम

बिलासपुर। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के चरण-2 के अंतर्गत जिले की ग्राम पंचायतों में तरल अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विकेन्द्रित अपशिष्ट जल शोधन प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नालियों, नदियों एवं तालाबों में जाने से रोकना तथा उसे उपचारित कर पुनः उपयोग के योग्य बनाना है।
यह प्रणाली जल स्रोतों नदियों और तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने के साथ-साथ ग्रामीण आबादी को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएगी। परियोजना का मुख्य लक्ष्य अपशिष्ट जल के उचित उपचार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देना है।डीईडब्लूएटीएस
प्रणाली पारंपरिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की तुलना में किफायती एवं प्रकृति-आधारित तकनीक पर आधारित है। इसमें रासायनिक प्रक्रिया के बजाय सूक्ष्मजीवों एवं पौधों की सहायता से जल का शोधन किया जाता है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि अपशिष्ट जल का उपचार उसी स्थान पर किया जाता है, जहां वह उत्पन्न होता है।
उपचारित जल का उपयोग बागवानी, कृषि कार्य एवं शौचालय फ्लशिंग जैसे कार्यों में किया जा सकेगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार एवं जल संसाधनों का संरक्षण संभव होगा।
जिले में वर्तमान में 46 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 25 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष 21 कार्य प्रगति पर हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से न केवल जल की बर्बादी को रोका जा रहा है, बल्कि ओडीएफ प्लस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल समाधान साबित होगी।

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