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ग्राम सहभागिता से ग्रामीण संसाधनों की पहचान — घुटकु में सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित

बिलासपुर, ।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के कृषि स्नातक चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम घुटकु में सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन, कृषि व्यवस्था, प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों तथा स्थानीय सामाजिक संरचना को ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से समझने का व्यावहारिक अवसर प्रदान करना था।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ ग्राम के कृषकों, कृषक सखी, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्राम के प्रमुखजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर ग्रामीणों और विद्यार्थियों के बीच हुए प्रत्यक्ष संवाद ने कार्यक्रम को जीवंत एवं ज्ञानवर्धक बना दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हेम प्रकाश वर्मा ने सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन की अवधारणा, उद्देश्य एवं उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास और कृषि की वास्तविक आवश्यकताओं को समझने के लिए केवल आंकड़ों और पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्रामीण समुदाय के अनुभव, स्थानीय ज्ञान और उपलब्ध संसाधनों को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता के लिए ग्रामवासियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर ग्राम सरपंच श्री तिलक चंद वर्मा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती गीता देवांगन तथा जनपद सदस्य श्री रवि सोनी ने विद्यार्थियों से संवाद किया और ग्रामीण कृषि व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी साझा की। श्रीमती गीता देवांगन ने विद्यार्थियों को धान खरीदी व्यवस्था, कृषक पंजीयन तथा धान की आवक-जावक से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने किसानों के लिए संचालित व्यवस्थाओं को समझने तथा ग्रामीण स्तर पर कृषि प्रशासन की भूमिका को जानने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

जनपद सदस्य श्री रवि सोनी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब विद्यार्थी कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को खेत, किसान और ग्रामीण परिवेश की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ सकें। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्रामीणों के अनुभवों से सीखने तथा स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके व्यावहारिक समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।

रंगोली के माध्यम से ग्रामीण संसाधनों की तस्वीर

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से रंगोली के माध्यम से विभिन्न सहभागी मानचित्र एवं आरेख तैयार करना रहा। विद्यार्थियों ने ग्रामवासियों के साथ मिलकर फसल वितरण मानचित्र, संसाधन मानचित्र, चपाती आरेख, मौसमी मानचित्र, समय-रेखा मानचित्र एवं सामाजिक मानचित्र तैयार किए।

फसल वितरण मानचित्र के माध्यम से ग्राम में विभिन्न फसलों के क्षेत्रवार वितरण एवं कृषि पद्धतियों को समझने का प्रयास किया गया। संसाधन मानचित्र में कृषि भूमि, जलस्रोत, सड़क, आवासीय क्षेत्र, सामुदायिक संसाधन तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्रामीण संसाधनों को दर्शाया गया। इसी प्रकार चपाती आरेख के माध्यम से ग्राम में विभिन्न संस्थाओं, समूहों एवं हितधारकों के बीच संबंधों और उनकी भूमिका को समझने का प्रयास किया गया।

मौसमी मानचित्र के माध्यम से वर्ष के विभिन्न महीनों में कृषि गतिविधियों, मौसम, फसल चक्र, श्रम की उपलब्धता तथा ग्रामीण गतिविधियों में होने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित किया गया। समय-रेखा मानचित्र के माध्यम से ग्राम के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों एवं कृषि व्यवस्था में समय के साथ आए परिवर्तनों को समझा गया, जबकि सामाजिक मानचित्र के माध्यम से ग्राम की सामाजिक संरचना और विभिन्न परिवारों एवं समूहों की स्थिति को सहभागी ढंग से अभिलेखित किया गया।

किताबी ज्ञान से खेत तक का सफर

पीआरए गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों ने यह अनुभव किया कि किसी गांव की वास्तविक तस्वीर केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के अनुभव और स्थानीय ज्ञान से अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी ने विद्यार्थियों को स्थानीय कृषि पद्धतियों, संसाधनों की उपलब्धता, फसल विविधता, मौसमी बदलाव, सामाजिक संबंधों तथा ग्रामीण समस्याओं को निकट से समझने का अवसर दिया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से प्रश्न पूछे, उनके अनुभव सुने और उपलब्ध संसाधनों तथा स्थानीय परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इस प्रक्रिया ने विद्यार्थियों में सामुदायिक सहभागिता, संवाद कौशल, समस्या पहचान, आंकड़ा संकलन तथा ग्रामीण परिस्थितियों के विश्लेषण जैसी व्यावहारिक क्षमताओं का विकास किया।

यह सहभागी मूल्यांकन कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों के लिए एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि किसान और विद्यार्थी के बीच ज्ञान के दोतरफा आदान-प्रदान का माध्यम भी बना। जहां विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान एवं आधुनिक तकनीकों से संबंधित अपने ज्ञान को साझा किया, वहीं ग्रामीणों ने अपने अनुभव, स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक कृषि व्यवहारों से विद्यार्थियों को समृद्ध किया।

ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम का मूल उद्देश्य कृषि स्नातक विद्यार्थियों को गांव, किसान और कृषि की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना है। इस दृष्टि से ग्राम घुटकु में आयोजित सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए ‘कक्षा से खेत और खेत से समुदाय तक’ सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

कार्यक्रम महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तथा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. हेम प्रकाश वर्मा के समन्वय में संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ ग्रामवासियों के सहयोग ने इसे प्रभावी एवं उद्देश्यपूर्ण बनाया।

ग्रामीण विकास की सबसे प्रभावी शुरुआत ग्रामीणों की सहभागिता और उनके स्थानीय ज्ञान को सम्मान देने से होती है। सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल ग्राम के संसाधनों और कृषि व्यवस्था को समझा, बल्कि यह भी जाना कि किसान और ग्रामीण समुदाय स्वयं अपने क्षेत्र के विकास के महत्वपूर्ण ज्ञान-स्रोत और भागीदार हैं।

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