जिंदा व्यक्ति को मृत दिखाकर करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल…तत्कालीन पटवारी नवीन त्रिपाठी की भूमिका अहम..एसएसपी ने दिए एफआईआर के निर्देश

बिलासपुर। ग्राम सेंदरी में जमीन के कथित फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। एक जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाकर उसकी जमीन का नामांतरण कराने, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि हड़पने और बाद में जमीन को टुकड़ों में बांटकर बिक्री करने के आरोप में पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को दिए आवेदन में ग्राम सेंदरी की शासकीय अभिलेखों में दर्ज भूमि खसरा नंबर 2108/2, रकबा 0.186 हेक्टेयर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन के अनुसार उक्त भूमि जे.के.एस. प्लास्टिक नार्मल बिलासपुर पार्टनर कृष्ण लाल गोस्वामी पिता बृजलाल के नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज बताया गया है। शिकायत में आरोप है कि भूमि को कथित षड्यंत्र के तहत हड़पने के उद्देश्य से कृष्ण लाल गोस्वामी के मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना ही तत्कालीन तहसीलदार के सी.टी. सीरीज क्रमांक 202324400105900006 में मृत्यु संबंधी प्रविष्टि दर्ज कराई गई।
इसके बाद तत्कालीन पटवारी द्वारा मृतक के वैधानिक वारिस को छिपाते हुए ग्राम पंचायत सेंदरी से कथित रूप से बिना हक-अधिकार नामांतरण का प्रस्ताव कराया गया। आवेदन में तत्कालीन पटवारी सेंदरी नवीन कुमार त्रिपाठी पर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित प्रक्रिया के बाद जमीन को फौती के तहत तरनदीप सिंह अरोरा के नाम से दर्ज कराया गया और बाद में गीता पटेल पति कौशल पटेल के नाम रजिस्ट्री कराई गई। आरोप है कि जमीन को टुकड़ों में विभाजित कर बिक्री की प्रक्रिया भी शुरू की गई।शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 23 अप्रैल 2026 को जे.के.एस. प्लास्टिक फर्म के नाम से शेष भूमि की पुनः बिक्री रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता ने जमीन की कीमत करोड़ों रुपये होने का दावा करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। मामले में पुलिस अधीक्षक की ओर से एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद अब पुलिस जांच में दस्तावेजों की सत्यता, नामांतरण प्रक्रिया और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।