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डायल 112 की सभी 28 गाड़ियां कंडम, इमरजेंसी सेवा संजीवनी बनी बेबस

अब पेट्रोलिंग गाड़ियों के भरोसे चल रही आपात सेवा

बिलासपुर. कभी आम लोगों के लिए
संजीवनी मानी जाने वाली डायल 112 सेवा अब जिले में खुद संकट से जूझ रही है। हालात ऐसे हैं कि इस सेवा के लिए उपलब्ध सभी 28 वाहन कंडम हो चुके हैं, जिससे आपातकालीन सहायता व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। जानकारी के अनुसार, पहले 10 वाहन खराब होकर बंद हो गए थे। इसके बाद शेष 18 गाड़ियों से किसी तरह सेवा चलाई जा रही थी, लेकिन अब वे भी पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी हैं। नतीजतन, सभी वाहनों को खड़ा कर दिया गया है।
अब 112 पर आने वाले कॉल्स का जिम्मा संबंधित थानों की पेट्रोलिंग टीमों को सौंपा गया है। लेकिन हर थाने में आमतौर पर एक ही पेट्रोलिंग वाहन होता है।जो पहले से गश्त, अपराधियों की धरपकड़, कोर्ट और अस्पताल ड्यूटी में व्यस्त रहता है। ऐसे में हर इमरजेंसी पर तुरंत पहुंच पाना मुश्किल हो गया है।

दो बड़ी समस्याएं बन रही बाधा

पहली समस्या यह है कि पेट्रोलिंग वाहन हर समय किसी न किसी काम में लगे रहते हैं. जिससे 112 कॉल पर उनकी तत्काल उपलब्धता नहीं हो पाती। दूसरी बड़ी चुनौती बड़े थाना क्षेत्रों और ट्रैफिक का दबाव है। सरकंडा, सिविल लाइन, कोटा, तखतपुर, सीपत, मस्तूरी और सिरगिट्टी जैसे क्षेत्रों में एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने में काफी समय लगता है।

पहले मिलती थी तुरंत मदद

डायल 112 सेवा की खासियत यही थी कि दुर्घटना, झगड़े या मेडिकल इमरजेंसी में तुरंत सहायता मिल जाती थी। घायल को अस्पताल पहुंचाने से लेकर प्रसूता महिलाओं को समय पर इलाज दिलाने तक यह सेवा बेहद कारगर थी।

रिस्पॉन्स टाइम पर उठे सवाल

अब निजी वाहनों की व्यवस्था भी बंद हो चुकी है और विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना वाहनों के इमरजेंसी सेवा का रिस्पॉन्स टाइम कैसे सुधरेगा। यह स्थिति प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गई है।

पेट्रोलिंग गाड़िया क्या क्या देखे,बड़ी चुनौती

जाहिर सी बात है कि कब गाड़िया नहीं है और तत्काल किसी को मदद चाहिए तो ऐसे में कैसे होगा बिना गाड़ी के मदद,इसके लिए जिले में भले ही पेट्रोलिंग गाड़िया वैकल्पिक तौर पर लगाई गई है।लेकिन फिर भी डायल 112 की लोगो को बहुत याद आती है।

वर्जन
डायल 112 सेवा आम नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ वाहन पुराने होने के कारण तकनीकी रूप से अनुपयोगी हो गए हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से रिप्लेस करने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में थानों की पेट्रोलिंग गाड़ियों को रिस्पॉन्स के लिए लगाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को मदद मिलती रहे। जल्द ही संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी और नई गाड़ियां भी आने वाली हैं।

रजनेश सिंह, एसएसपीबिलासपुर

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