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त्यौहारी सीजन में बिलासपुर की सड़कों पर जाम में कौन कहां फंसा,सड़को पर दिखाई नहीं दे रही पुलिस

बिलासपुर। इस शहर की यातायात व्यवस्था यूं तो अरसे से सवालों के घेरे में है, लेकिन त्यौहारी सीजन में जब बाजारों में भीड़भाड़ ज्यादा है, लोग जाम में फंस रहे हैं। इस जाम से राहत दिलाने की कोशिश करती हुई पुलिस कहीं दिखाई नहीं दे रही है। मानों कुछ किया ही नहीं जा सकता। शहर में यह समस्या समय के साथ बढ़ती ही जा रही है, लेकिन समाधान की कोई योजना स्थानीय स्तर पर किसी के पास है और न ही सरकार के पास ही है।

दरअसल यह तस्वीर शुक्रवार की शाम पौने छह बजे की है। सदर बाजार रोड में लगे इस जाम से निकलने की कोशिश में में लोग परेशान थे। पुलिस वहां मौजूद नहीं थी। लोग जिधर से पा रहे थे, घुसते जा रहे थे। कुछ क्षण के लिए लगा कि लोगों में झगड़े न शुरू हो जाएं। हर कोई जाम से निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जगह नहीं थी। लोगों का सब्र जवाब दे रहा था। कुछ लोग सामने आए और किसी तरह जाम में फंसे लोग निकल सके। शहरी व्यवस्था में एक अच्छा काम हो जाएं तो उसका श्रेय लेने की होड़ शुरू हो जाती है, परन्तु रोज लोगों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन पर कोई कुछ नहीं कहता। इस शहर में बढ़ती बंदइंतजामी की सबसे बड़ी वजह यही है।

क्या है शहर का मास्टर प्लान

शहर के मास्टर प्लान की बात कई बार होती है। इस प्लान को धरातल पर उतारने की कोशिश होती हुई दिखाई नहीं देती। वर्षों हो गए पूरा शहर पांच किलोमीटर के दायरे में चार प्रमुख सड़कों पर सिमट कर रह गया है जबकि शहर का विस्तार चारों ओर 20 किलोमीटर तक हो चुका है। अगर मास्टर प्लान पर काम हुआ होता तो इस शहर की ऐसी हालत नहीं होती। पिछले दस वर्षों में शहर के विकास तथा नागरिक सुविधाओं पर एक भी उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ। रेलवे ओवरब्रिज इतने संकरे साबित हो रहे हैं कि वहां भी जाम लगने लगा है। कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है।

घर से निकलने के बाद घर कब वापस आएंगे ट्रैफिक जाम के कारण समय तय नहीं

अगर यही हाल रहा तो लोग घरों से निकलने से पहले यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि घर से निकल तो रहे हैं, पता नहीं कब तक लौट पाएंगे। ट्रेन और फ्लाइट पकड़ने वाले अभी से एक घंटे का समय रखकर चलने लगे हैं। 120 फीट की सड़क बनाने की बात की जाती है और जब बनाने की सरकारी मंजूरी होती है तो वह 40 फीट की हो जाती है। ऐसा इसलिए हो जाता है क्योंकि अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने के लिए सरकार के खजाने में पैसे कम हो जाते हैं। शहर के नेता चुप रह जाते हैं।

स्ट्रीट लाइट तक नहीं जल रही

शहर में सुगम यातायात की ही समस्या नहीं है बल्कि ऐसी कई समस्याएं हैं, जिनका समाधान ढूंढने में देरी की गई तो लोगों की मुश्किल बढ़ती जाएगी। हालत यह है कि जो काम हो सकता है , वह भी ठीक से नहीं हो रहा है। जो समस्या लोगों को है वह उन्हें तो दिखाई देना ही चाहिए जो यही देखने की पगार लेते हैं। दुर्भाग्य से इस शहर में यह भी नहीं हो रहा है। शहर भर में कई जगह स्ट्रीट लाइट तक बंद रहती है। यहां तक कि पुलों पर लगी लाइट तक नहीं जल रही है।

सड़क बनी शोरूम का पार्किंग,ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल

ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा कर रही है। लेकिन शहर के मुख्य मार्गों पर ही नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं, तिफरा चौक से हाईकोर्ट जाने वाले मार्ग पर गाड़ियों के शोरूम संचालकों द्वारा बड़ी संख्या में वाहन सड़क किनारे और मुख्य मार्ग पर खड़े किए जा रहे हैं, इसके चलते हाईकोर्ट और रायपुर की ओर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, पुलिस कह रही है कि नो-पार्किंग और ट्रैफिक वायलेशन के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।

जमीनी तस्वीर पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर रही

शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर यातायात पुलिस ने शहर को अलग-अलग डिटेल में बांटकर निगरानी और पेट्रोलिंग की व्यवस्था की है, एडिशनल एसपी ट्रैफिक रामगोपाल करियारे के मुताबिक पेट्रोलिंग के दौरान जहां भी व्यापारिक प्रतिष्ठानों या एजेंसियों द्वारा अनावश्यक रूप से सड़क पर वाहन खड़े किए जाते हैं, वहां कार्रवाई की जा रही है।

कई स्थानों को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया

पुलिस का कहना है कि कई स्थानों को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया है और आने वाले दिनों
में ऐसे दूसरे इलाकों को भी नो-पार्किंग जोन घोषित कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन सवाल ये है कि जब तिफरा चौक से हाईकोर्ट मार्ग जैसे महत्वपूर्ण रास्ते पर ही शोरूम की गाड़ियां मुख्य सड़क पर खड़ी दिखाई दे रही हैं, तो फिर जिम्मेदारी किसकी है? शोरूम संचालकों से पुलिस ने अपील की है कि ग्राहकों और शोरूम की गाड़ियों को निर्धारित पार्किंग स्थल या अपने व्यावसायिक परिसर में ही खड़ा किया जाए, ताकि सड़क पर जाम और यातायात दबाव की स्थिति न बने।

पुराने बस स्टैंड,राजीव प्लाजा,तेलीपारा,गोलाबाजार,लिंक रोड पर वाहनों का जमावड़ा

शहर के ऐसे कई चौक चौराहे और नो पार्किंग जोन है जहां पर। पार्किंग नहीं होने के कारण सड़कों पर गाड़ियों को रखना पड़ता है।जिसमें चालान भी आ जाता है।सड़क पर रखो तो चालान,मल्टीलेवल पार्किंग पर रखो तो पैसा और ज्यादा दूर रखो तो खरीदारी करना मुश्किल,इस तरह से नुकसान सिर्फ और सिर्फ आमजनों का हो रहा है।लोगो का कहना है कि पार्किंग नहीं है और बेवजह का चालान काटा जाता है। जबकि ऐसे कई रोड है जहां पर सड़क नहीं है पार्किंग जोन नहीं है ऐसा में लोग अपनी गाड़ियों को कहां रखे,यही कारण है कि शहर की ट्रैफिक समस्या बनी रहती है और ट्रैफिक जाम खत्म होने का नाम नहीं ले पा रहा है।

वर्जन
नो पार्किंग जोन बना हुआ है।पार्किंग स्थल भी है।और खाली स्थानों पर भी गाड़ियों को रखा का सकता है।नियम तोड़ने वाले को चालान भेजा जाता है।

रामगोपाल करियारे
एएसपी ट्रैफिक बिलासपुर

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