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दीक्षारंभ-2026 के छठवें दिन नवप्रवेशी विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान, सुरक्षा एवं रोजगार के अवसरों की दी गई जानकारी

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित छात्र प्रेरण कार्यक्रम ‘दीक्षारंभ-2026-27’ के छठवें दिन विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका, कार्यस्थल पर लैंगिक सुरक्षा, कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं प्लेसमेंट के अवसरों तथा व्यावहारिक कृषि गतिविधियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, संस्थागत गतिविधियों, नैतिक मूल्यों, सुरक्षित कार्य वातावरण तथा भविष्य की रोजगार संभावनाओं से अवगत कराना रहा।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने ‘कृषि विज्ञान केंद्र का महत्व एवं भूमिका’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक जानकारी एवं उन्नत कृषि पद्धतियों को पहुंचाने में कृषि विज्ञान केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के उद्देश्यों, दृष्टिकोण, मिशन तथा प्रमुख गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाने तथा किसानों की स्थानीय समस्याओं को वैज्ञानिकों तक पहुंचाने के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य करता है।

डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षण, प्रदर्शन, प्रक्षेत्र परीक्षण, कृषक प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श, कृषि नवाचारों के प्रसार तथा क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों एवं प्रक्षेत्रों से जोड़कर व्यावहारिक समझ विकसित करें।

इसी सत्र में ‘कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न—रोकथाम, निषेध एवं निवारण’ विषय पर महाविद्यालय की महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के विरुद्ध शिकायत समिति की संयोजक एवं सह-प्राध्यापक (कीट विज्ञान) डॉ. (श्रीमती) अर्चना केरकट्टा ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सम्मान एवं सुरक्षित वातावरण के अधिकार पर प्रकाश डालते हुए यौन उत्पीड़न की अवधारणा, उसके विभिन्न स्वरूपों तथा इससे संबंधित सावधानियों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को शिकायत निवारण की संस्थागत व्यवस्था, शिकायत समिति की भूमिका तथा आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध सहायता एवं शिकायत प्रक्रिया के बारे में भी अवगत कराया।

सह-प्राध्यापक (मृदा विज्ञान) एवं शिकायत समिति की सदस्य सचिव डॉ. (श्रीमती) युष्मा मारु ने भी विषय को विस्तार से समझाते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक विद्यार्थी एवं कर्मचारी के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित और भेदभावमुक्त वातावरण आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों एवं उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में उचित संस्थागत माध्यम का उपयोग करने की जानकारी दी। इस दौरान विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की तथा जागरूकता बढ़ाने वाले विभिन्न पहलुओं को समझा।

कृषि विज्ञान केंद्र का कराया गया भ्रमण

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों को केंद्र में संचालित विभिन्न गतिविधियों, प्रक्षेत्रीय प्रयोगों, प्रदर्शन इकाइयों एवं कृषि तकनीकों से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र की प्रक्षेत्र प्रभारी डॉ. (श्रीमती) चंचला रानी पटेल ने छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए उन्हें प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया तथा विभिन्न कृषि गतिविधियों की जानकारी दी।

विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित विभिन्न प्रक्षेत्रीय गतिविधियों को निकट से देखा और कृषि शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर प्राप्त किया। इस दौरान विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

प्लेसमेंट एवं रोजगार के अवसरों की दी जानकारी

कार्यक्रम के अगले सत्र में अतिथि शिक्षक (कृषि विस्तार) डॉ. हेम प्रकाश वर्मा ने प्लेसमेंट गतिविधियों एवं रोजगार के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए सरकारी एवं निजी क्षेत्र के साथ-साथ कृषि-उद्यमिता, कृषि प्रसार, बैंकिंग, बीमा, बीज एवं कृषि आदान उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय तथा उच्च शिक्षा के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।

उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट एवं एल्युमिनि इकाई के मुख्य उद्देश्यों एवं भूमिका पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को प्लेसमेंट प्रक्रिया, रोजगार की तैयारी, साक्षात्कार कौशल, व्यक्तित्व विकास तथा रोजगारपरक दक्षताओं के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही अपने करियर लक्ष्य निर्धारित कर उसके अनुरूप ज्ञान, कौशल एवं संचार क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि कृषि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ज्ञान, कौशल, नवाचार, उद्यमिता, किसानों की सेवा और समाज के सतत विकास की व्यापक संभावनाएं निहित हैं। ‘दीक्षारंभ’ जैसे कार्यक्रम नवप्रवेशी विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं संस्थागत संस्कृति से जोड़ने के साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे, वैज्ञानिक अजीत विलियम्स, डॉ. हेम प्रकाश वर्मा, कार्मेंद्र चक्रधारी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और कृषि शिक्षा, सुरक्षित कार्य वातावरण, व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा रोजगार की संभावनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

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