दो-तीन गुना बिजली बिल से उपभोक्ता हुए परेशान,कांग्रेस ने सरकार और बिजली विभाग को घेरा

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स्मार्ट मीटर पर चल रहा है बड़ा बवाल
बिलासपुर। बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल वास्तविक खपत की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़कर आ रहे हैं। बढ़े हुए बिलों की शिकायतें लगातार बिजली विभाग के कार्यालयों में पहुंच रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई उपभोक्ताओं ने अब स्मार्ट मीटर हटाने तक की चेतावनी दे दी है। वहीं कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और बिजली विभाग पर निशाना साधा है।लगातार बिजली के दाम बढ़ने
और बजट गड़बड़ाने से उपभोक्ताओं के बीच खलबली मची हुई है।आमजनता
का सीधे और साफ कहना है कि पहले इतना बिजली जलता था और बिल कम आता था लेकिन अब भी बिजली उतना ही
जलता है इसके बाद भी बिजली बिल ज्यादा आता है।जिसके कारण पूरे घर का बजट बिगड़ गया है।आलम ये हो चुका है कि अब बिजली को टाइम से बंद और टाइम से शुरू करना पड़ता है।अन्यथा पहले कमरे में लाइट जल रहा है लेकिन अब ऐसा है क्या आगे उस कमरे में नहीं है तो लाइट को बंद करके आना पड़ता है।हालत इतना खराब हो चुका है कि
आमजनों की कमर टूट चुकी है।लगातार बिजली की महंगाई और बढ़ते बिजली के दरों से आमजनों को परेशानियों में डाल दिया गया है।
40 हजार उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगाने से किया इनकार
बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बिलासपुर शहर में अब तक करीब 1.05 लाख घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं लगभग 40 हजार उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगवाने से इनकार कर दिया है। कई स्थानों पर मीटर लगाने और रीडिंग लेने पहुंचने वाले कर्मचारियों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगवाना स्वैच्छिक प्रक्रिया है, लेकिन विभागीय कर्मचारी इसे अनिवार्य बताकर दबाव बना रहे हैं।
तिफरा की हाईटेक लैब पर भी उठ रहे सवाल
बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतों के बीच बिजली कंपनी ने तिफरा में करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट मीटर टेस्टिंग लैब स्थापित की है। विभाग के अनुसार पिछले तीन महीनों में 47 उपभोक्ताओं ने अपने मीटर जांच के लिए जमा कराए और सभी मीटर तकनीकी जांच में सही पाए गए। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि जांच प्रक्रिया के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा, जिससे लैब की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप- पूरे प्रदेश में उपभोक्ता परेशान
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद सिर्फ बिलासपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश से दो से तीन गुना अधिक बिजली बिल आने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के नाम पर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर को “अडानी का मीटर” बताते हुए इसकी कार्यप्रणाली और स्मार्ट मीटर टेस्टिंग लैब की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।
उपभोक्ताओं का आरोप-शिकायत के बाद भी नहीं मिल रही राहत
स्थानीय उपभोक्ता शकुंतला कौशिक का कहना है कि उनके इलाके में अधिकांश लोगों के बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं। शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो लोग अपने घरों से स्मार्ट मीटर हटाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका यह भी आरोप है कि विभागीय कर्मचारी लक्ष्य पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव बना रहे हैं।
बढ़े हुए बिजली बिलों से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा
बिजली उपभोक्ता संतोष सोनी ने कहा कि बढ़े हुए बिजली बिलों से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर टेस्टिंग लैब से भी लोगों को संतोषजनक समाधान नहीं मिल रहा, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
विभाग का दावा- स्मार्ट मीटर पूरी तरह सही
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता सुरेश जांगड़े ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिलासपुर जिले में 3 लाख 76 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं, जिनमें से अब तक करीब 64 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। विभाग के अनुसार करीब 2 लाख 42 हजार सरकारी और गैर-सरकारी परिसरों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को अपने स्मार्ट मीटर पर संदेह है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत तिफरा स्थित अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब में जांच करा सकता है। विभाग का दावा है कि पूरी जांच प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित की जाती है तथा अब तक जांच के लिए आए सभी 47 मीटर सही पाए गए हैं।