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नगर निगम बिलासपुर में अव्यवस्था का आलम,दावे कागजों में,गंदगी सड़कों पर,सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

कचरा,नालियां और गंदगी का आलम – शहर बेहाल,दावे फेल

बिलासपुर। स्मार्ट सिटी बिलासपुर में नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर तालाब में बदल रहा है, नालियां जाम हैं, कचरे के ढेर और बदबू से लोग परेशान हैं, जबकि निगम के दावे और खर्च करोड़ों में हैं।

दरअसल बिलासपुर नगर निगम को स्मार्ट सिटी कहे जाने वाले बिलासपुर में नगर निगम की सफाई व्यवस्था बद से बदतर हो गई है। हर गली-मोहल्ले में कचरे के ढेर, जाम नालियां और गंदगी का साम्राज्य है। बारिश होते ही शहर तालाब में बदल जाता है।जिसको लेकर कोई गंभीर नहीं है।बल्कि अधिकारी से लेकर महापौर तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।जिनका दावा बहुत बड़ा रहता है और वायदा ऐसा रहता है कि मानो तत्काल हो जायेगा लेकिन वर्षों बीत जाते है काम पूरे नहीं होते या फिर शुरू ही नहीं होता है।जिसके कारण आमजनता को खामियाजा भुगतना पड़ता है।
यही कारण है कि लोग शहर मे कचरा
गंदगी और बदबू से परेशान है जिसकी शिकायत पार्षद से लेकर महापौर तक की गई है ।लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है।कहा जा रहा है कि सिर्फ वोट लेने के लिए आते है बाकी समय गायब रहते है।

कचरे के ढेर – उठाव नहीं

70 वार्डों में घर-घर कचरा कलेक्शन के लिए एमएसडब्ल्यू और लॉयंस कंपनी को ठेका दिया गया है, हर महीने 7 करोड़ से ज्यादा भुगतान हो रहा है, फिर भी सुबह कचरा गाड़ी नहीं पहुंचती।लोग मजबूरन कचरा सड़क किनारे, खाली प्लाट और नालियों में फेंक रहे हैं। सरकंडा, मंगला, तालापारा, चांटीडीह, तोरवा, तिफरा, लिंक रोड में सुबह-शाम कचरे के ढेर लगे रहते हैं।सूखा-गीला कचरा अलग नहीं हो रहा, डोर टू डोर कलेक्शन फेल।

नालियां जाम,जलभराव का कारण

शहर की 80% नालियां गन्दी, पॉलिथीन और कचरे से भरी हैं। नाला सफाई साल में एक बार खानापूर्ति के लिए होती है।पुराना बस स्टैंड, श्रीकांत वर्मा मार्ग, गोल बाजार, तेलीपारा, अग्रसेन चौक, कश्यप कॉलोनी, अज्ञेय नगर में 10 मिनट की बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है।
नालियों में डूबी पेयजल पाइप लाइनों से 59 वार्डों में गंदा पानी सप्लाई होने का खतरा बना हुआ है।

गंदगी से बीमारी का खतरा

सार्वजनिक शौचालय बदहाल – पानी नहीं, बदबू और गंदगी से भरे।नालियों का गंदा पानी सीधे अरपा नदी में जा रहा है, 70 से ज्यादा नालों का पानी बिना ट्रीटमेंट के नदी में गिर रहा है।डेंगू, डायरिया और बदबू की शिकायतें बढ़ीं।

जमीनी हकीकत क्या है?

शहर की अधिकांश नालियां महीनों से साफ नहीं हुईं, कचरे से पटी पड़ी हैं। गोल बाजार, तेलीपारा, अग्रसेन चौक, तिफरा, मंगला, सरकंडा, तालापारा में जलभराव और कचरा आम है। सार्वजनिक शौचालय बदहाल हैं – पानी नहीं, सीटें टूटीं, दरवाजे टूटे। लोगों को मजबूरन खुले में जाने की नौबत।
सड़कों पर निर्माण सामग्री, रेती-गिट्टी रखकर रास्ता जाम, कचरा खुले प्लाटों और नालियों में फेंका जा रहा है।

85 करोड़ का खेल – सफाई शून्य

नगर निगम ने सफाई दो निजी कंपनियों एमएसडब्ल्यू और लॉयंस को दे रखी है। आरोप है कि हर महीने 7 करोड़ से ज्यादा, सालाना 85 करोड़ से ऊपर भुगतान किया जा रहा है, बिना पार्षदों और निरीक्षकों के सत्यापन के। फाइलों में सफाई दिखाकर पैसा निकाला जा रहा है, जमीन पर कूड़े का अंबार है।

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