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सुनारों के बिगड़े सुर और ताल

प्रधानमंत्री की अपील से रोजी-रोटी का संकट

भाटापारा- होती थी कमाई 700 से 1000 रुपए रोज। अब बमुश्किल से हो रही है 200 से 300 रुपए। कैसे मिटाई जा सकेगी 5 सदस्यों वाले परिवार की भूख? सवालों के जवाब खोज रहा है रवि सोनी।

एक साल तक सोने की खरीदी नहीं करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील ऐसे सुनारों पर बेहद भारी पड़ रही है, जिनकी रोजी-रोटी की व्यवस्था आभूषणों की खरीदी- बिक्री के बाद मरम्मत से होने वाली आय से ही होती थी।


प्रतीक्षा में पूरा दिन

प्रधानमंत्री की अपील के बाद सराफा बाजार लगभग शून्य पर आ चुका है। सीधा और पहला असर ऐसे सुनारों पर पड़ा है, जो सराफा दुकानों के सामने आभूषणों की मरम्मत करने के लिए बैठते हैं। खरीदी पर ब्रेक के बाद यह वर्ग पूरा दिन प्रतीक्षा में गुजार रहा है। हद तो यह कि मरम्मत तो दूर, जान- पहचान वाले उपभोक्ताओं की भी आवाजाही बंद हो चुकी है।


बंद यह काम भी

स्वर्णाभूषणों की खरीदी बंद होने के बाद, मरम्मत का काम पूरी तरह बंद हो चुका है। माला गुंथनें का काम अपील के पूर्व के दिनों में खूब करते थे सुनार। आर्थिक मजबूती देने वाला यह काम भी तेजी से कम हो रहा है। रोजमर्रा के खर्च आसानी से पूरे होते थे, नाक और कान छिदवाने से होने वाली आय से लेकिन अब यह भी नहीं। यह स्थितियां ऐसे सुनारों पर बेहद भारी पड़ रही है, जो पूरी तरह सुनारी के काम पर ही निर्भर हैं।


कैसे मिटाएं भूख?

पांच सदस्यों वाले परिवार की जिम्मेदारी उठा रहे रवि सोनी की पहली चिंता यह है कि रोजमर्रा की जरूरत के लिए कैसे पैसों की व्यवस्था करें? यह चिंता रवि सोनी जैसे करीब दो दर्जन सुनारों में भी देखी जा रही है क्योंकि सराफा दुकानों के सामने बैठकर वह भी मरम्मत का काम करते हैं। दुकानें खुल रहीं हैं लेकिन शून्य मांग का सीधा और बड़ा असर सुनारों पर ही पड़ रहा है।

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