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फलों में स्टीकर बैन…!

‘सही दवा-शुध्द आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार ‘ अभियान में दे रहे जानकारी

कोंडागांव- अब फलों में स्टीकर नहीं लगाए जा सकेंगे। परीक्षण रिपोर्ट में इन्हें स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह माना गया है। इस खुलासे के बाद फलों में स्टीकर लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

‘ सही दवा-शुद्ध आहार-यही छत्तीसगढ़ का आधार’ इस थीम के साथ जांच कर रहा खाद्य एवं औषधि प्रशासन अब फल और सब्जी बाजार में भी पहुंच गया है। पहली बार फल और सब्जी कारोबारियों को परिवहन, भंडारण और विक्रय करने के लिए मानक की जो जानकारी दी उससे हैरत में है यह कारोबारी क्षेत्र।


इसलिए स्टीकर बैन

सेब एकमात्र ऐसा फल है जिसमें स्टीकर लगाए जाते हैं। अब केले में भी लगाए जाने लगे हैं। ऑर्गेनिक या इंपोर्टेड जैसे शब्द उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हैं। इसे देखते हुए खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में स्टिकर और फलों की जांच की गई, तब यह खुलासा हुआ कि स्टीकर को चिपकाने वाला द्रव्य फल की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। नुकसान पहुंचा सकता है ऐसे फलों का सेवन। इसलिए फलों में स्टीकर लगाना प्रतिबंधित कर दिया गया है।


औचक जांच फल और सब्जी बाजार में

मर्दापाल। कोंडागांव जिले के व्यावसायिक क्षेत्र में तेजी से उभरता शहर है। सही दवा- शुद्ध आहार अभियान ने जब यहां प्रवेश किया, तब कई तरह की खामियां मिलीं लेकिन फल और सब्जी बाजार ने परिवहन, भंडारण और विक्रय को लेकर जांच दल को जिस अंदाज में सहयोग का आश्वासन दिया, वह टीम का उत्साह बढ़ाने वाला था।


मां दंतेश्वरी मेडिकल को नोटिस

दो कॉस्मेटिक, चार निजी अस्पतालों की जांच के बाद जांच दल मां दंतेश्वरी मेडिकल स्टोर्स पहुंचा। दस्तावेजों की जांच में नारकोटिक्स मेडिसिन की खरीदी- बिक्री के दस्तावेज अनियमित मिले। इसलिए नोटिस जारी करने का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा है। अनुमति के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच दल ने एक्सपायरी प्रोडक्ट के लिए अलग से बॉक्स की व्यवस्था की सलाह संस्थानों को दी है।

वर्जन
स्टीकर पर प्रतिबंध

नुकसान पहुंचा सकता है स्टीकर लगे फलों का सेवन। इसलिए फलों में स्टीकर पर बैन लगाया गया है। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन होता मिला, तो विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
-रोशन वर्मा, नोडल अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, कोंडागांव

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